सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 215, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंनिषेक अध्याय : १९९,
(७) आघान लग्न से २-५-९ भावों पर शुभ ग्रह हो या पुरुप ग्रहको दृष्टि होया
उसमें पुरुषांश होवे तो पुत्र । इसके विपरीत दृष्टि-स्त्रीग्रह की दृष्टि हो या सम
राश्यंशक होवे तो कन्या होगी ।
(८) आघान लग्न में अष्टम स्थान और उससे अष्टम स्थान अर्थात् लग्न से तीसरे स्थान
पर सूर्य हो तो पुत्र ।
(९) आधान लग्न से त्रिकोण में सूर्य हो तो पुत्र ।
इस:आधान लग्न में शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो जातक दीर्घायु भाग्यत्रान् और सवं
विद्या का ज्ञाता हो ।
(१०) इन योगों के अभाव में लग्न को छोड़ कर विषम राशि में शनि हो--अन्यमत से
विषम भाव में शनि हो तो पुत्र ।
(११) परुष ग्रह बलवान् होकर केन्द्र में हो ठो पुत्र होगा ।
(१२) बुध लगन में या विषम राशि के नवांश में हो तो पुत्र होगा ।
(१३) बुध लग्न में या सम राशि के नवांश में हो तो कन्या होगी ।
यमल (जुड़वां) योग |
(१) गुरु, सूयं, चन्द्र, शुक्र, मंगल ये द्वि-स्वभाव राशि के नवांश में हों और उन्हें बुध
देखता हो तो यमल (दो बालक) का जन्म हो । बली ग्रह हों तो पूर्ण फल 1
(अ) यहाँ द्वि-स्वभाव के पुरषांश (३,९। में गुरु ओर सूयं हो तो दो पत्र हों।
(ब) एवं चन्द्र शुक्र और मंगल द्विस्वभाव के स्त्री नवांश ( ६,१२ ) में हों तोदो
कन्या हों ।
(स) यदि दोनों योग हों तो एक पुत्र एक कन्या हो 1
(२) लग्न चन्द्र सम राशियों में हो और पुरुष ग्रह की दृष्टि हो तो उपरोक्त फल ।
(३) बुघ मंगल गुरु लग्न समराशि में हो और बलवान् हो तो उपरोक्त फल।
(४) सूर्य चतुष्पद राशि में हो शेष ग्रह से युक्त. होकर द्विस्वमाव राशि में हो तो यमल
का जन्म ।
(५) गर्माबान कुंडली में आतृ स्थानेश और लग्नेश का योग हो तो यमल का जन्म होगा ।
(६) लग्नेश waq स्थान में हो या अन्य स्थान मे हो तो यमल हो ।
(७) आधान लग्न या उससे तीसरे में तृतीयेश हो तो यमल का जन्म हो।
(८) आधान लग्नेश और तृतीयेश लग्न में हो तो यमल हो ।
(९) आधान लग्नेश और तृतीयेश तृतीय भाव में हो तो यमल हो ।
(१०) जन्म लग्न कोई हो परन्तु चन्द्र शुक्र ये दोनों ग्रह समराशि में हों व बुध मंगल
गरु व लग्न ये ४ विषम राशि में हों तो यमल १ लड़का, १ लड़को हो 1
(११) दवि स्वभाव के अंश में स्थित सूयं और गुर यदि बुघ से दुष्ट हो तो २ पुत्र हों ।
(१२) चन्दर, शुक्र और मंगल द्विस्वभाव में हों तो २ कन्या हों।
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