सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 216, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें२०० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड
यमल २ बालक
(१) बुध, मंगल, गरु और लग्न ये हिस्वमाव के हों, लग्न यदि द्विस्वभाव नवांश में
हो, बुघ स्वनवांश में होकर सम को देखता हो तो ३ यमल बालक हों ।
(२) उपरोक्त ग्रह मिथुन व घन राशियों में हों उन पर बुध की दृष्टि हो, 'यह बुध
मिथुन लग्न के नवांशक में हो तो २ पुत्र हों । अन्यमत--मिथुन व घन नवांश वाले
लग्न गत ग्रहों को मिथुनांशक बुघ देखे तो ३ पुत्र हों ।
(३) कन्या व मीनांशक वाले छग्न गत पूर्वोक्त ग्रह मंगल गुर को कन्यांश गत बुध देखे
तो ३ कन्या हों । अन्यमत--कन्या व मोन इन राशियों के ' नवांश में “उपरोक्त ग्रह
हों व. कन्या राशि:के नवांश में होकर बुध देखे तो ३ कन्या हों । :अथवा कव्या
या मिथुन नवांश गत ग्रहों व लग्न को कन्यांश गत बुघ देखे तो ३. कन्या हों 1
(४) पूर्वोक्त योगकर्ता ग्रहों को मिथुनांश गत बुध देखे तो २ पुत्र १ कन्या हो ।
अन्यमत-मंगल गुरु व लग्न ये द्विश्वमाव नवांशक में हों वं बुध मिथुनांश में दिस्वभाव अंश में होकर सबको देखता हो तो २ पुत्र, १ कन्या हो ।
(५) पूर्वोक्त ग्रह मंगल गुरु को द्विस्वभावांश में बुध बैठकर देखे तो २ कन्या, १ पुत्र हो ।
अन्यमत-पुर्वोक्त ग्रह द्विस्वभाव राशि के नवांश में हों इनको कन्या राशि के नवांश
गत बुष देखे तो २ कन्या १ पुत्र गर्भ में होगा ।
३ से अधिक संतान
लग्न घनु के अंत्य नवांश का लर्न हो ओर पूर्वोक्त योग कारक ग्रह घनु के नवांश
में हो और लरन को बलवान् बुध और शनि देखे तो गर्भ में ३ से अधिक बच्चे
होंगे । अन्यमतरूघन लग्न में घन नवांश हो पूर्वोक्त योग कारक ग्रह ९-१२ राशि
के अंशको में हों और वलवान् बुध शनि ऊग्न को देखे तो गर्भ में बहुत बच्चे हों ३
से अधिक १० तक हो सकते हैं ।
नपुंसक योग
(१ ) सम राशि में बैठा चन्द्र विषम राशि के qq को देखे परस्पर दृष्टि हो।
मतांतर--चंद्र और सुर्य की परस्पर दृष्टि हो ।
11 = या चन्द्र सम राशि में हो, विषम में सूर्य हो जिस पर चन्द्र की दृष्टि हो ।
(२) शनि और बुध में परस्पर दृष्टि हो :
मतांतर--शनि विषम राशि में हो, वुध सम राशि में हो परस्पर दृष्टि हो ।
» शनि बुष द्विस्वमाव राशि में हों ।
„विषम बुघ पर सम राशि में स्थित शनि की दृष्टि हो ।
( ३ ) विषम में शनि हो सूर्य पर दृष्टि हो या युग्म राशियों में हों ।
(४) सम राशि में चन्द्र विषम में बुघ हो मंगल की दृष्टि दोनों पर हो मंगळ कोई
राशि में हो। मवांतर-=चन्द्र सम राशि में वुध विषम में हो दोनों को परस्पर
दृष्टि हो ।