भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२०२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड

नाल वेष्टित ( नाल से लिपटा हुआ )

( १) मेष, वृष, सिंह लग्न हो, शनि मंगल से युक्त हो तो लग्न में जो राशि हो

उस राशि विभाग के समान अंग में नाल वेष्टित जन्म होगा । मंगल qa से युक्‍त हो

तो नाल वेष्टित न होगा ।

मतांतर--मेष वृष व सिंह लग्न हो उसमें शनि या मंगल हो तो लग्न में जिस राशि

का नवांश हो उस अङ्ग में नाल वेष्टित जन्म होगा ।

( २ ) मेष वृष सिंह वृश्चिक लग्नो में जन्म लेने वाला नाल वेष्टित पैदा होता है L:

जन्म लग्न पुरुष राशि हो तो दक्षिण पाएवं में स्त्री राशि हो तो वाम पाइवँ में नाल

लपटा समझना ।

(३) == में पापग्रह हो, बहुत पापग्रहों को दृष्टि हो या वह पापग्रह के घरमें

दया राहु,केतु से युक्त हो । २

(४ ) लग्न पापग्रहों के बोच हो, लग्न में राहु हो या लग्न में मंगल सूर्य से दृष्ट

हो या लग्न में शनि मंगल से दृष्ट हो तो राशि समान अंग में नाछ वेष्टित हो ।

(५) लग्न में १-२-५ राशि में से कोई हो उसमें मंगल व सूर्य हो या सूर्य

सहित शनि हो तो राशि के अंश समान अंग में नाल वेष्टित होगा ।

(६ ) आघान लग्न मेष हो उप्त पर पापग्रह मंगल या शनि हो उसका नवांश कर्क

हो तो छाती के ऊपर वच्चे का नाळ छाटा qr क्योंकि करे नाल-पुरुष का हृदय है

यमल नाल वेष्टित :

सूर्य चतुष्पद राशि में हो, अन्य ग्रह बलवान्‌, एवं हिस्वभाव रा ज्ञयों में हो तो

यमल ( २ बालक ) नाल वेष्टित होंगे ।

मपं वेष्टित ( सर्पाकार नसों से व तदाकार नाल से रिपटा ) ।

( १ ) चन्द्रमा मंगल के द्रेष्काण में हो और शुभग्रह २-११ स्थान में हों तो बालक

सप कार ( नाल वेष्टित ) होगा ।

(२) चन्द्रमा पापग्रह को राशि में छःन में हा, लग्न मंगल के द्रेष्काण में हो शुभ

ग्रह २-११ स्थान में हो तो उपरोक्त फल i .

( ३ ) अष्टमेश लग्न में राहु सहित हो तो वालक सपं वेष्टित होगा ।

(४) लग में सर्प या अण्डज द्रेऔकाण हो तथा द्रेऽकाग अपने स्वामो से युत हो.

ओर शुभ दृष्टि रहित हो तो उपरोक्त फल ।

(५) जन्म लन कोई हा चन्द्र किसा स्थान में हो या किती राशिका हो परन्तु

चन्द्र मंगल के द्रेष्काण में हो तो सर्पाकार हो। ;

(६) राहु और गुलिक किसो भो केन्द्र में हाँ या आघ्रान लगन का स्त्रामी अष्टमेश

युत केन्द्र में हो, लग्न में पाप ग्रह हो ।

( ७ ) आधान लग्न का द्रेष्काण पापयुक्त हो ।

(८) लग्न में पापग्रह हो, बहुत पाप ग्रहों से दृष्ट हो या पाप ग्रह के घर में राहु-

केतु युक्त हो ।