सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंनिषेक अध्याय : २०३
( ९.) लग्नेश पापग्रह हो, लग्नेश और चतुर्थेश एक दूसरे के घर में हों ।
(१० ) आधान लग्न में पापग्रह हों कई पापग्रहों की दृष्टि हो या पापग्रह की
राशि में राहु या केतु हो ।
उपयोग--ये सब वातें जन्म समय सत्य है या नहों यह मिलान करने के लिये हैं ।
वामन ( ठिगना )--छूग्त मकर राशि के अंत्य नवांश में हो उस पर सूर्य चन्द्र व
शनि को दृष्टि हो तो ५२ अंगुल का शरीर हो अर्थात् ठिंगना हो 1
अर्थात् लग्न मकर हो मकर का ही नवांश हो अर्थात् वर्गोत्तम हो उस पर इन ग्रहों
की दृष्टि हो ।
गूगा १--कोई क्रूर ग्रह किसी भी राशि के नवम नवांश में आ पड़े, चन्द्र वृष!का
हो उस पर मंगल व शनि की दृष्टि हो तो गूगा हो 1 इस चन्द्र पर णुभ ग्रह की दृष्टि
हो तो कुछ दिन में बोलने लगता ë ।
x—q का चन्द्र हो पापग्रह कर्क वुश्चिक मीन इन नवांशो में हो तो गूगा हो।
चन्द्र पर शुभग्रहों की दृष्टि हो तो बहुत वर्षों में बोलने लगता है । पाप दृष्टि हो तो
वाणी हीन हो ।
पंगु ( लंगड़ा )--मीन लग्न हो उस में चन्द्र हो तथा ५-१-५ राशि के अंत्यांश
गत पाप ग्रहं हो । या वृष का चन्द्र सूर्य शनि मंगल से दृष्ट हो शुभग्रह की दृष्टि न हो
तो लंगडा हो ।
३--लग्न में तीसरा द्रेष्काण हो लग्न में पापग्रह हो शनि चन्द्र सूयं देखते हों तो
पैर से लंगड़ा हों ।
कुबड़ा या लूंगड़ा--शनि मंगल ये वुध के नवांशक में हों या बुध को राशि में हों
तो कुवड़ा या लंगडा हो 1 : :
(२) ककं फा चन्द्र लग्न में हो उसे शनि मंगल देखते हों तो उपरोक्त फल ।
लूला ( हाथ रहित )--लग्न में दूसरा द्रेष्काण हो लग्न में पाप ग्रह हो शनि चन्द्र
सूयं ये लग्न को देखते हों तो ठूला हो 1
छोटा सिर--रूग्न में प्रथम द्रेष्काण हो. लग्न में पापग्रह हो शनि चन्द्र सूर्य की
दृष्टि हो तो छोटा सिर हो ।
दुगुने अंग--बुघ त्रिकोण ५-९ भाव में हो, अन्य ग्रह बल रहित हों उस बालक:
के सिर हाथ पैर दूने हों अर्थात् २ सिर ४ हाथ ४ पैर आदि हों ।
सिर बाहु पाँव रहित-=कग्न में मंगल हो उसपर सूर्य चन्द्र शनि की दृष्टि हो ।
यदि लग्न में प्रथम द्रेष्काण हो=सिर रहित हो ।
: यदि लग्न में दूसरा द्रेष्काण होच्हाथ रहित ।
यदि लग्न में तीसरा द्रेष्काण हो-पैर रहित 1
परन्तु शुभ दृष्टि न हो तब पूरा फल होता है ।
अन्य मत से छर्न में पाप ग्रह हो द्रेष्काण हो तब उक्त फल हो ।