सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 220, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें२०४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
अन्य मत--बिना हाथ--लग्न में प्रथम द्रेष्काण हो और 'दूसरा तीसरा द्रेष्काण
पाप युक्त हो । बिना पैर--छरन में दूसरा द्रेश्काण* हो और पहिला
तीसरा द्रेष्काण पाप युक्त हो । बिना सिर- लग्न में तीसरा द्रेष्काण
हो और पहिला: दूसरा द्रोष्काण पाप युक्त हो ।
अन्य मत--बिना हाथ--लग्न से पंचम में जो द्रेष्काण हो यह मंगल युक्त हो और
सूयं चन्द्र शनि से दुष्ट हो । बिना सिर--लस्त में जो द्रेष्काण हो यह
मंगल युक्त हो और सूये चन्द्र शनि से दृष्ट हो। विना पैर--नवम
स्थान में जो प्रोष्काण हो वह मंगल युक्त हो और सूर्य चंद्र शनि से
दृष्ट हो।
बहिरा—सूर्य, मंगल, शनि व चन्द्र ये ग्रह कर्क वृष्चिक मीन इन राशियों के नवांश
में हों तो बहिरा हो।
मूर्स--चंद्र और पाप ग्रह संधि में अर्थात् कर्क वृश्चिक मीन के अंत नवांशों में हों
तो मूखं हो । इनपर शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तव पुरा फल होता है यदि
शुभदुष्ट हुआ तो वुरा फल नहीं होता ।
अंघा--आघान लग्न या जन्म लर्न सिंह हो जिसमें सूर्य व चंद्र हो व मंगल व
शनि की दृष्टि हो यदि लग्न में शुभ ग्रह युक्त या दुष्ट न हो तो जन्म से
अंधा हो। यदि शुभाशुभ दोनों योग दृष्टि हों तो नेत्र चंचल या
कातर हो।
काना--सिंह लग्न में केवल सूर्यं हो उसपर मंगल शनि की दृष्टि हो तो=दाहिनी
आँख कानी हो । सिंह लग्न में केवल चन्द्र हो उसपर मंगल शनि को
दृष्टि हो तोच्यांई आँख कानी हो ।
लगत से ११ वें स्थान में पाप युक्त चंद्र हो=्तो बाई आँख रहित ।
लग्न से १२वें स्थान में पापयुक्त चन्द्र हो=्तो दाहिनी आँख रहित ।
इन योगों में योगकर्ता ग्रहों पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो सम्पूर्ण बुरा फल नहीं
होता । इन योगों में शुभ दृष्टि भी हो तो बुद-बुद लोचन अर्थात् १ आँख छोटी या आँख
पर फूली आदि हो ।
फूली-सिंह लगन में सूर्य चन्द्र हो उसपर शुभ और पाप ग्रहों को दृष्टि हो तो
आँख में फूलो हो ।
गर्भ में दांत जमे--शनि और मंगल बुध के राशि नवांशक में हों तो बालक के गभं
में ही दांत जमे ।
(१) बुध की राशि ३-६ या वुधांश एक में भी शनि मंगल हो तो.भी वही फल।
दांत उगने का मासानुसार फल
पहिले गास में दाँत जमॅस्बालक आप ही न रहे ।
दुसरे मास में दाँत जमॅस्भाई न रहे।
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