भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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निषेक अध्याय : २०५

तीसरे मास में दात जमें=बहिन न रहे!

चौथे मास में दाँत जमें-ःमाता न रहे ।

पांचवें मास में दांत जमेंल्‍जेज्ठ भ्राता न रहे ।

दीर्घायु आहह sÑ पर शुभ ग्रह हो या शुभ ग्रहो की दृष्टि हो तो जातक र्घायु हो ।

स्वभाव--निषेक समय स्त्री पुरुष का मन या स्वभाव जैसा हो वैसा ही गर्भ गत

बालक होता है ।

स्त्री पुरुष को रोग--सूर्य से सप्तम था लग्न से सप्तम शनि मंगल हो तो पुरुष को,

यदि चन्द्र सप्तम हो तो स्त्री को रोग हो।

स्त्री रोग--प्ररन लग्न से चन्द्र बुध अष्टम हो तो उस स्त्री को कई प्रकार के रोग

' हों भूत देव आदि का दोष हो | गमं नहीं ठहरता, या काक वंघ्या (एक

बार गमं रह कर फिर नहीं रहता ) हो जाती हैं ।

सगभं स्त्रो का मरण

(१) छन या चन्द्र दोनों या एक भी, राशियों से या अंशो से पाप ग्रहों के बीच हो और

शुभ ग्रह न देखे तो वह गर्भिणी स्त्री गर्भ सहित नाश हो 1

(२) लर्न या चन्द्र पाप ग्रहों से युवत या दृष्ट हो शुभ युक्त या दृष्ट न हो तो भो उपरोक्त फल ।

(३) पाप ग्रह चन्द्र से चतुर्थं हो भोर अष्टम में मंगल हो तो सगभं स्त्री का नाश ।

(४) लग्न से चतुथं में पाप ग्रह हो अष्टम में मंगल हो तो सगभ स्त्री का नाण हो ।

(५) लग्न में चौथा मंगल बारहवा सूर्यं और क्षीण चन्द्र हो तो सगभं स्त्री का नाश ।

(६) लग्न में शनि हो जिसे मंगल और क्षोण चन्द्र पूर्ण दृष्टि से देखे तो सगर्भ स्त्री का

नाश ।

(७) आघान लग्न में पापग्रह बारहवें हों लग्न में जाने वाला हो व लग्न को कोई शुभ ग्रह

न देखता हो तो उपरोक्त फल ।

(८) लग्न में चन्द्र हो लग्न से दूसरे स्थान में पाप ग्रह हो व दूसरा पाप ग्रह लग्न से

ब्रारहवें स्थान में हो । लग्न में चन्द्र पाप ग्रह के नवांश में हो तो उपरोक्त फल । या

लग्न में चन्द्र पाप ग्रहसे दृष्ट हो। २-१२ भाव में पापग्रह हों तो उपरोक्त

फल हो ।

(९) आघान लग्न से बारहवें स्थान में पाप ग्रह हो, दुसरे स्थान में भी पाप ग्रह हो

तीमरे स्थान में मो चन्द्र, चतुर्थ में पाप ग्रह हो लग्न पाप ग्रहों के बीच हो लन को

शुभ ग्रह या चन्द्र न देखे तो उपरोक्त फल ।

(१०) पापग्रह वारहर्वे भावः में हो शुभ ग्रह उसे न देखे तो,उपरोक्त फल ।

(११) पाप ग्रह १, ६, ७, ८, १२, भावों में हो तो निःसंदेह पुत्र सहित माता मरे ।

(१२) शनि के साथ चन्द्र हो, सूर्य बारहवें मंगल चौथे भाव में हो तो गर्भ सहित मां

मरे ।