सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 223, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंनषेक अध्याय : २०७
- (३) दो पाप ग्रह लर्न और सप्तम स्थान में हाँ शुभयुक्त दृष्ट न हों तो भो मासा-
'घिप नष्ट प्रभाव हो उस समय गर्भिणी की शस्त्र से मृत्यु हो । सप्तम में सूर्य लग्न में
मंगळ हो तो शस्त्र प्रहार से मुत्यु हो ।
साता की मृत्यु
(१) ४-७ भाव में पापग्रह हों उसके साथ चंद्र भो हो तो माता को मृत्यु हो ।
(२) लग्न में सूर्य चतुर्थ चन्द्र, सप्तम शनि हो ।
(३) लग्त और चन्द्रमा क्रूर ग्रह से दृष्ट हो शुभ बुघ दृष्ट न हो यदि गुरु केन्द्र में
न हो तो माता का नाश हो.
(४) चन्द्र से ४-१० में पापग्रह हो शुभदृष्टि न हो ।
(५) सूयं से १० भाव में पापग्रह हो शुभदृष्टि न हो ।
(६) लर्न में अष्टम. सूर्य या मंगल पापदृष्ट हो शुभदृष्ट न हो चन्द्र कृष्णपक्ष
काहो। |
७) जम्म दिन में हो, शुक्र से सूयं ९-५ भाव में हो, पाप दृष्टि हो शुभ दृष्टि न ह्रो ।
रात्रि में जन्म हो चन्द्र से शनि ९-५ घर में हो उसे पापग्रह देखते हों शुम दृष्टि
न हो या चन्द्रमा बलरहित हो ।
९८) चन्द्रः २ भाव में, शनि मंगल ३ भाव में हों ।
(९) चन्द्रमा, मंगल-दानि में से एक से युवत हो ।
(१०) शनि मंगल के बीच चन्द्र हो तो स्त्रो की मृत्यु ।
युरुष की मृत्यु
१-सूर्य से १२ वें शनि मंगल हों तो पुरुष को अपने मास में मृत्यु देवें !
२--सूर्य मंगल में से एक से युक्त चन्द्र हो तो पुरष की मृत्यु ।
३--शनि मंगल के बीच सूय हो तो पुरुषः की मृत्यु ।
४--चर राशि में मंगल युक्त हो, रात्रि का जन्म हो तो पिता परदेश में मरे।
५--किसी स्थान में सूर्य, शनि मंगळ से युक्त हो तो जन्म से पहिले पिता मरे ।
६--दिन के जन्म में सूर्य, रात्रि के जन्म में शुक्र मंग से दुष्ट हो ।
७--या सूयं शुक्र चर राशि में हों मंगल से युक्त व. दृष्ट हों तो परदेश में पिता
की मृत्यु ।
स्त्री पुरुष दोनों की मृत्यु
- १--श निः मंगल से युक्त सूयं चन्द्र हों या इनसे दृष्ट हों तो स्त्री पुरुष दोनों का
मरण हो । गर्भ के दिनों में इन योगों का फल होता हुः!
माता पिता सहित बालक को मृत्यु
१--चंद्रमा से ७, ८, ९ भावों में सभो पाप ग्रह हों तो उत्पन्न बालक की माता
'पिताँसहित मृत्यु हो 1