भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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— लि oe ५

' २०८ t ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

२---चंद्रमा २ पाप ग्रहों के बीच.होकर लग्न में हो और सप्तम-अष्टस स्थान में

पाप ग्रह हों तो माता पिता बहिन एवं बालक को मृत्यु हो ।

मां या बाप को अरिष्ट फल

१--गर्भ लग्न में मंगल व शनि दोनों अरिष्ट कारक हों, इन दोनों ग्रहों में जो

अधिक बली हो उस ग्रह का बल जिस महोने में अधिक हो उसी मास में वह ग्रह अरिष्ट

करेगा ।

२--आधान लग्न को सूर्य देखता हो तो पिता को बुरा ।

झाघान लग्न को शुक्र देखता हो तो माता को बुरा ।

“रात्रि के आघान लग्न को शनि देखता हो तो पिता.को बुरा ।

रात्रि के आघान लग्न को चंद्र देखता हो तो माता को बुरा 1

दिन के आधान लग्न को शनि देखता हो तो काका को बुरा ।

दिन के आधान लग्न को चन्द्र देखता हो तो मौसी को बुरा ।

रात्रि के आधान लग्न को सुयं देखता हो तो. काका को बुरा 1

रात्रि के आघान छन्न को शुक्र देखता हो तो मौसी को बुरा ।

अरिष्ट कारक गभ

आधान लग्न में अरिष्ट कारक ग्रह हों तो सम्वन्धियों को इस प्रकार अरिष्ट होगा-

१--उस लग्न से सूर्य जिस स्थान में हो वहाँ से मंगल शनि सप्तम हो तो वाप फो

रोग कारक ।

उस लग्न से चंद्र जिस स्थान में हो वहाँ से मंगल शनि सप्तम हो तो माता को रोगा

कारक ।

२--उस लग्न से मंगल शनि जिस स्थान में हों वहाँ से दुसरे, वारहयें या दोनों

स्थान में से किसी स्थान में चंद्र हो तो माता को चंद्र का अरिष्ट हो ।

उह लग्न से मंगल शनि जिस स्थान में हों वहां से दुसरे वारहवें या दोनों, स्थान

में से किसी स्थान में सूयं हो तो पिता को चंद्र का अरिष्ट हो ।

३--या उसी लग्न में सूयं चन्द्र एक ही स्थान में हों उससे २-१२ स्थान में मंगल

ब शनि हों तो वे ग्रह उस गर्भ के माता पिता दोनों को अरिष्ट कारक हूँ ।

४-स्ं चन्द्र पाप दृष्ट हों तो माता पिता को मानसी व्यथा हो 1

शुभ पाप ग्रह युक्त या दृष्ट से मिश्रित फल होगा ।

पिता को अरिष्ट

4— से सप्तम में शनि मंगळ हों उसे शुभ ग्रह न देखता हो तो पिता को अरिष्ट p

२--पाप ग्रह १२, ८ भाव में हो लग्नेश बल रहित हो तो पिता रोगी हो। '

३--पाप ग्रह ४, ८ भाव में हो लग्नेश बल रहित हो तो पिता रोगी हो 1

४--जन्म में सूयं शनि बलवान्‌ हो सूयं को शनि या मंगल देखे तो पिता

रोगी हो।