सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 225, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंनिषेक अध्याय : २०९
पिता आदि का नाश
१--छग्त से ५, ९ भाव पाप ग्रह की राशि हों उसमें सूर्यादि ग्रह हों तो क्रमानुसार
पिता, माता, भाई, नानी, नाना और बालक का शीघ्र नाश करे |
भाई का नाश
१--जछ मन से छठे स्थान में क्रूर ग्रह हो तो भाई का नाश हो 1 किसके समान रूप होगा
. 84 बलवान् हो तो पिता के तुल्य रूप आदि होगा ।
चनः बलवान् हो तो माता के तुल्य रूप आदि होगा ।
सुख प्रसव ॥
t— एवं चन्द्रमा से केन्द्र, घन स्थान, त्रिकोण भावों में शुभ ग्रह हों और
३, ११ भाव में पाप ग्रह हों उन पर सूर्य की दृष्टि हो तो गर्भ बलवान् होकर सुख युक्त जन्मेगा ।
२--पइन लग्न में चतुर्थेश बलवान् हो तो सुख से गर्भ का प्रसव हो, कष्ट न होगा । ३--शुम ग्रह २, ४ भावों में हों तो सुख प्रसव हो ।
४--बक्लेश प्रसव योगों में शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो शुभ प्रसव हो ।
५--"लग्न शुभ ग्रह युव या दृष्ट हो तो सुल प्रसव हो ।
६--चन्द्र से ४, १० घर में शुभ ग्रह हो तो सुख प्रसव हो ।
कृष्ट प्रसव
१--चन्द्र के साथ सूर्य मंगल शनि राहु केतु हो या चन्द्र को देखें तो अति कष्ट
से डावटरों सहायता से जन्म हो । š
२--पाप ग्रह चन्द्र के साथ या लग्न से १ या ७ घर में हो तो प्रसव में अधिक
कष्ट हो |
३--५, ९, ७ भाव में पाप ग्रह हो ।
४--चंद्र पाप युक्त हो या चन्द्र से ४, ७ घर में पाप ग्रह हो ।
५--चंद्र से ४ या ८ घर में पाप ग्रह हो ।
६--चंद्र पाप युक्त ४ या ७ स्थान में हो तो प्रसव में अधिक कष्ट हो ।
कृष्ट समय
लर्न या चन्द्रमा से ४, ७ घर में पाप का अधिकार हो तो १ घडी, पाप दृष्टि हो तो
२ घड़ी, पाप योग होवे तो एक पहर तक माता को अति पीड़ा हो 1
उल्टा प्रसव
१--छग्न में शनि, बारहवां चन्द्र ओर gd नोच राशि या अंश में हो तो उल्टा
प्रसव होवे ( पहिले पैर निकलें ) 1 >
२--आघान लग्नेश दशम में हो, लग्न में राहु हो तो उल्टे ( पैर से) जन्म हो।
लग्नेश या नवांशपति ग्रह या लग्नस्थ ग्रह वक्री हो तो उल्टा प्रसव हो ।
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