भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२१२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

१-ऊम्न में पक्षी द्रेष्काण हो तो पक्षी का जन्म । इसके २ भेद हँ जल और स्थल

के पक्षी ।

२--लग्न में चर राशि का नवांश हो बलवान्‌ ग्रह से युक्त या दृष्ट हो शनि से

युत दृष्ट हो तो स्थळ पक्षी, चंद्र से युक्त हो तो जल पक्षी जानना ।

३--बुघ का नवांश लग्न में हो उसमें बली ग्रह हो और शनि से युत दृष्ट हो तो

स्थळ पक्षी हो । यदि चंद्र से युक्त दृष्ट हो तो जल पक्षी जानना अर्थात्‌ शनि के योग या

दृष्टि से स्थल,के, चन्द्र के योग या दृष्टि से:जल पक्षी का. इन योगों में विचार करना ।

वृक्ष जन्म

( १) छन, चन्द्रमा, गुरु या सूर्य निर्बल हो तो प्रश्‍न से वृक्ष कहना । लग्न नवां

जले राशि हो-जल वृक्ष 1 स्थळ राशि हो-स्थल वृक्ष जानो । वृक्ष संख्या-स्थल या जल

राक्षि के स्वामी लग्न से जितनी राशि पर हों उतनी संख्या वृक्षों की जानना ।

उच्च या वक्र गति वाले ग्रह या स्वगृही ग्रह हों तो तिगुनी संख्या जानना अपने

वर्गोत्तम नवांश या राशि में हो तो दुगुनी संख्या जानना 1

वृक्ष प्रकार

छग्नांश पति--सूर्य-भीतर पुष्ट वाली लकडी शीशम आदि ।

दानि-देखने में बुरी अप्रिय कुश आदि ।

'चन्द्र-दूघ वाले या रस वाले गन्ना आदि ।

, मंगल-कांटे वाले वृक्ष बबूरू खैर वेल आदि ।

गुरु फल वाले वृक्ष आम आदि 1

बुघ-विना फल वाले केवल फूल वाले ।

शुक्र -फूल वाळे चम्पा चमेली आदि |

चन्द्र-चिकने चीड़ देवदारु सादि ।

मंगल-कटु नीम गिलोय आदि ।

; वृक्ष की भूमि-पूर्वोक्त स्थल या.जळ राशि के स्वामी --

यदि शुभग्रह पापग्रह की राशि में हो तो अच्छे वृक्ष दुष्ट भूमि में पैदा हों ।

यदि पापग्रह शुम ग्रह की राशि में हो तो अशोभन वृक्ष सुन्दर भूमि में हों ।

यदि शुभग्रह शुभ राशि में हो तो शुभ वृक्ष रुचिर भूमि में होंगे ।

यदि अशुम ग्रह अशुम राशि में हो तो अशुभ वक्ष अशुभ भूमि में होंगे ।

इस प्रकार-चह ग्रह अपने नवांश से जितने नवांश पर हो उतने वृक्ष उसी प्रकार

के कहना ।