सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 229, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंला गुरु चंद्र शुद्ध भ | सुर्य मंगल | शिन बुघ
ë पीला विचित्र “रक्त कृष्ण हरा
निषेक अध्याय : २१३
पशु का कालांग
मनुष्य का कालांग आगे. बताया है । जैसा मनुष्य का काळांग कहा हुँ वेसे ही
राशियों से पशु के शरीर का भी विचार होता ë ।
राशि मेष वृष मिथुन ककं सिह कन्या तुला वृश्चिक घन मकर कुंभ मीन
अंग सिर मुख अगले पीठ चूतड़ sÑ - पुच्छ गुदा . पिछले लिंग स्फिज पुच्छ
कंठ पैर व छाती दोनों . मूल पैर वृषण पेट के
कंधा या दोनों दोनों तफं
पेट - ( गुदा के
दोनों ओर )
रग =
, जो ग्रह लग्न में हो वह रंग नष्ट वस्तु का कहें। लग्न में कोई ग्रह न होतो
जो ग्रह लग्न को देखता हो उस का वर्ण लेना । किसी ग्रह से युक्त या दृष्टन होतो
लग्न के नवांश का वर्ण कहे । यदि लग्न में कई ग्रह हों तो बलवान् ग्रह का रंग अधिक
कहे । स्वामी युवत राशि का यदि लग्न में नवांश हो तो सब को छोड़ उसी का रंग कहे ।
पीठ की रेखा ' :
लग्न से सप्तम स्थान में बज्वान् ग्रह हो तो उसके अनुसार पशु के पीठ को
कहां जन्मा ; =
भूमि में जन्म--३ से अधिक ग्रह नीच राशि में हों या लग्न में या चतुर्थ में वृश्चिक
(नीच ),का चन्द्र होःतो भूमि में जन्म हुआ । :. . . ;
वृक्ष के नीचे जन्म--सप्तम में मंगल, पंचम में सूयं हो तो बन में किसी वृक्ष के नीचे
जन्म--शुभग्रह नीच राशियों में हो वो वृक्ष के नोचे या लकड़ी के घर में 1
जंगल में-जन्म लग्न या जन्म राशि एक हो वहां चंद्र हो, उस चंद्र को यदि
३ ग्रह न देखते हों या. शुभग्रह नीच में और लग्न चन्द्र को ३ से अधिक ग्रह न देखें ।
नौका पुल या ट्रेन में-पूर्ण चंद्र कर्क राशि में हो व. qu ss में हो,, गुर
चतुर्थ में हो ।
जल के ऊपर नाव आदि में--छर्न में जलचर राशि हो, सप्तम में चन्द्र हो ।
लग्न में जलचर राशि हो, चन्द्र भी जलचर राशि का हो, या जल राशि लग्न को
पूर्ण चंद्र देखे, जलचर राशि का चन्द्र लग्न चतुर्थ का दशम में हो, या लग्न चतुर्थ, दशम
में जलचर राशि हो । : ; १
कारागृह में-लन में चंद्र हो पापग्रह से दृष्ट हो, दवादश स्थान में शनि हो, लग्न
== से शनि १२ वां हो उस पर पापग्रह की दृष्टि हो । ; kE.