भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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निषेक अध्याय : २१५

अन्य मत अंधेरे में ओर भूमि में जन्म का

(१) चतुर्थ में चंद्र शनि की राशि और अंशक में ।

(२) या जलराशि में, जलचर राशि के अंशक में, शनि गे युक्त दृष्ट या नीच का 1

दीपवाले घर में जन्म

इसमें विशेष विचार यह है कि सूर्य बलवान्‌ मंगल से दृष्ट हो तो उक्त योगों के

०2, > होते हुए भो अंधेरे में जन्म नहीं समझना । दीपसहित घर में जन्म होगा । या चन्द्र को सूर्य की दृष्टि हो तो भी अधेरे में जन्म नहीं होगा ।

पहिले जो प्रसव स्थान के योग कहे Š उनक्रे अभाव में योग

(१) चर और स्थिर राशि लग्न में, लग्न की और नवांश की राशि के सदृश

भूमि में अर्थात्‌ जिस राशि की जो भूमि कही है उसी प्रकार की भूमि में 1

(२) सभी राशि के लग्न में यदि अपना नवांश वहाँ हो तो अपने घर में जन्म ।

जहाँ राशि के समान या नवांश के समान भूमि कहना इस पर विचार है कि जो बली

हो उसके समान भूमि कहना ।

माग में जन्म--चर राशि की लग्न हो और चर नवांश हो तो मार्ग में प्रसव ।

घर में--लग्न स्थिर राशि ओर नवांश हो या स्थिर राशि या स्वराशि स्वांश की

ग्रहों में हो तो घर में प्रसव । लग्न वर्गोत्तम ददौ तो अपने घर में ।

जहाँ जन्म हुआ वह घर केसा था

जन्म लग्न में शनि बलवान हो--पुराने घर में ।

मंगल बलवान्‌ हो--कहीं जला हुआ होगा 1

चन्द्र बलवान्‌ हो--नवीन घर ।

सूर्यं बलवान्‌ हो-उस घर की लकडी अच्छी है । परन्तु दीवाल अच्छी नहीं है ।

बुध बलवान्‌ हो--कारोगरी का घर |

शुक्र बलवान्‌ हो--रमणीक घर ।

गुरु बलवान्‌ हो--बड़ा घर !

घर के बाहर कांटेदार वृक्ष के समीप--लग्न से दूसरे या बारहवें पाप ग्रह हों ।

पुराना लिपा पुतता घर--लग्न या चन्द्र को बली चन्द्र देखे ।

उत्पन्न हुआ वालक केसा होगा-शरीर रंग वर्ण

शरीर--जन्म समय जो लग्न हो उसमें जो राशिनवांश का स्वामी हो उस सरीखा

बालक का शरीर होगा । या बुध जिस नवांश में हो तो उस राशि के समान खूप होगा U

वर्ण--लग्न में जो ग्रह बलवान्‌ हो उस सरीखा शरीर का वर्ण यां लग्नेश से या

जिस राशि पर चन्द्र हो उसके नवांश स्वामी सरीला बालक का रंग होगा । ग्रहों और राशियों के गुणधमं में उनके रंग बताये गये हैं ।

शरीर पर तिल--जिस स्थान पर राहु और शनि हो वहाँ काला Ps तिल आदि

होंगे । शरीर का वणं तिल आदि पर पूर्ण विचार आगे दिया है और शरीर का अंग भी

विचारना आगे फलांग में दिया है वह पृथक विषय हे ।