भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 233, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 233

निषेक अध्याय : २१७

१०--सूर्य चन्द्र गुरु नीच के हों ।

११--चन्द्र कहीं भी मङ्गल शनि व सूय से युवत हो ।

१२--लग्न में शनि चन्द्र हो, लग्न शुभ दृष्ट न हो ।

१३--लग्न में पापग्रह हो उसे लग्नेश न देखे, सूयं भी लग्न को न देखे ।

१४--तिथि के अंत में, दिन के अंत में, लग्न के अन्त में और चरनवांश में जन्म ।

१५--चतुथ॑ में मंगल बुध ओर ६, ८ दोनों भाव के स्वामी हों 1

१६--६, ९ भाव के स्वामी कहीं हों परन्तु क्रूर ग्रह युक्त या राहु केतु युक्त हों ।

१७--लग्न को चन्द्रमा, लग्नेश और सूर्य भी न देखे ।

परिहार---जिससे उपरोक्त योग न हो ( अर्थात्‌ जारज योग न हो )

१--चन्द्रमा गुरुक्षेत्र में या गुरुयुक्त हो या अन्यत्र गुरु के द्रेष्काण या नवांश में हो।

२--चन्द्र गुरु के क्षेत्र में ओर शुक्र अपनी राशि के बिना अन्यत्र हो या गुरु के

द्रेष्काण या नवांश में हो ।

३---चतुर्थ शुभग्रह युक्त या दृष्ट हो या चतुर्येश या कारक चन्द्र हो 1

४--चतु्थ में पापग्रह होवे उच्च के या अच्छे वर्ग में शुभ युक्त या दृष्ट हो 1

५--चतुर्थेश स्वनवांश में हो या वर्गोत्तम हो ।

अन्य जारज योग

१८--आत्मकारक के नवांश में केवळ पापग्रह से सम्बन्ध हो तो जार पुरुष से

उत्पन्न समझो । यदि आत्मकारक पाप हो अर्थात्‌ आत्मकारक मॅ पापत्व हो तो परजात

अर्थात्‌ दुसरे से उत्पन्न हुआ वह नहीं होता किन्तु आत्मकारक से भिन्न पापग्रहों के

सम्बन्ध से वह परजात ( जारज ) होता ë ।

१९--कारकांश में शनि ओर राहु हो तो जार से उत्पन्न होने को ख्याति हो ।

कारकांश में अन्य पापग्रह हो तो परजातक'गुप्त रहता हे । यदि शुभ का वर्ग हो तो

परजातत्व अपवाद मात्र होता है । कारकांश में यदि २ शुभग्रह हों तो कुल में श्रेष्ठ हो ।

२०--६, ८ भाव के स्वामी चन्द्र और मंगल से युक्‍त होकर चतुथं भाव में हो तो

जारज हो ।

२१--कारकांश लग्न में पापग्रह से सम्बन्ध हो तो जारज हो ।

२२-केन्द्रेश युक्त तृतीयेश हो तो जारज हो ।

२३--६, ८ भाव के स्वामी पापग्रहों से युक्त हों तो जारज हो 1

२४--ळग्न में २, ३, ५, ६ भाव में स्वामी होतो जारज हो ।

२५--लग्न में पापग्रह, सप्तम में शुभग्रह, दशम में शनि हो तो जारज हो ।

२६--छम्न में चन्द्र, पंचम शुक्र, तीसरे में मंगल हो। |

२७--लम्न में सूर्य, चतुर्थ में राहु हो वो चाचा से उत्पन्न हो ।

q¿— मंगल और राहु, सप्तम सूयं ओर चन्द्र हो तो नोच जात से उत्पन्न

हुआ समझो ।