भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२१८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

२९--केन्द्र में कोई ग्रह न हो तो जार से उत्पन्न ।

३०--सब ग्रह ९, ६, ८, १२ घर में हों तो जार से उत्पन्न ।

३१--गुरु का वर्ग लग्न में न हो तो जार से उत्पन्न ।

३२--१०, १ और ४ भाव में पापग्रह से युक्त चन्द्र हो और लग्न चन्द्र इन दोनों

पर गुरु को दृष्टि न हो तो जारज हो ।

३३--सूर्य-चन्द्र एक राशि में हों, गुरु से दृष्ट हों तो जारज हो ।

३४--४, ९ भाव में पापग्रह हो, लग्नेश निबंछ हो तो जारज हो !

३५--निर्बल लग्नेश चतुर्थ में २ पापग्रहों के बोच पाप दृष्ट हो तो जारज हो ।

३६--सप्तमेश पापयुवत धन भाव में मंगल से दृष्ट हो तो जारज हो ।

जारज योग भंग

39— गुरु से युत या दृष्ट हो या लग्न और चन्द्र गुरु की राशि या १० वर्ग में हो तो जारज योग भंग हो ।

अन्य योग

(१) लग्न से ९ या ६ इन दोनों भाव के स्वामी शनि युक्त कहो हों = शूद्र का जन्मा 1

(२) लग्न से ९ या ६ इन दोनों भाव के स्वामी बुष युक्त कहीं हों = वैद्य का जन्मा ।

(३) लग्न से ९ या ६ इन दोनों भाव के स्वामी सूयं युक्त कहीं हों-क्षत्रिय का जन्मा |

(४) लग्न से ९ या ६ इन दोनों भाव के स्वामी गुरु या शुक्र युक्त कहीं हों = ब्राह्मण का ।

बुध गुरु शुक्र ये क्रूर ग्रहों से युक्त या दुष्ट या नीच में या मस्त हों तभी उपरोक्त

योग जानना ।

(५) दूसरे स्थान में क्रूर ग्रह हो, ३, ७, या ५ स्थान में गुरु हो = नोच से उत्पन्न ।

(६) शुक्र शनि के नवांश में हो तो = दासी पुत्र ।

(७) या शुक्र व्यय स्थान में शनि के नवांश में हो = दासी पुत्र ।

(८) सथ चन्द्र नीच में हो या सप्तम में शनि दृष्ट हो = दासी पुत्र ।

इन जारज योगों के विचार में योगकारक ग्रह की प्रबलता और योग की अधिकता

देखकर ही फल कहना चाहिये और कई प्रकार से योग का विचार करना चाहिए ।

जन्म समय बच्चे का रोना

जनमते ही बहुत रोया-जन्म लग्न १, ३, ५, ९ राशि हों । अन्यमत से १, र, ५, ७, १० राशि ।

घीरे रोया--जन्म लर्न १, ७, ११ राशि हों । अन्यमत से ६, ७, १२ राशि या केवल ६, ११ राशि।

नहीं रोया- जन्म लग्न २, ४, ८, १०, १२, राशि हों । अन्यमत से २, ४, ८,

१०, ११, राशि या ३, ४, ८, ९, १२ राशि । जन्म समय पिता कहां था

_ पिता परोक्ष ( गैर हाजिर )--यदि लर्न को चन्द्र न देखे तो पिता जन्म समय घर

स कहीं बाहर परदेश में था अर्थात्‌ घर में नहीं था ।