सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 235, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंनिषेक अध्याय : २१९
(२) दशम से आगे घर में सुर्य चर राशि में हो लर्न भो चर राशि हो तो घर के बाहर कहीं रास्ते में 1
(३) लग्न में शनि हो 1 (४) या मंग सप्तम हो।
(५) या बुघ शुक्र की रासि व अंश के मध्य चन्द्र हो ।
(६) सूर्य चर राशि में हो वह लग्न से ८, ९, ११, १२, घर में से कहीं हो । (७) चन्द्र शुक्र व बुध ये एकही राशि में हों, अंश में चन्द्र यदि इनके बीच में हो ।
(८) चन्द्रमा चर राशि और चर नवांशक की संधि में हो लग्न को न देखे ।
(९) बुध और शुक्र के बीच चन्द्र हो ग्न को न देखता हो और मंगल दानि लग्न में हो ।
(१०) चन्द्र १, २, ८, ११, १२ भाव में हो ।
(११) लग्न में मंगल शनि हो, गुढ शुक्र केन्द्र के बाहर अन्यस्थान में हो ।
पिता मांग में
(१) सूर्य दशम से आगे घर में द्विस्वभाव राशि का हो-पिता रास्ते के बीच होगा ।
(२) सूयं हिस्वभाव राशि में ८, ९, ११, १२ घर में हो लग्न को चन्द्र न देखे तो
पिता रास्ते के बीच होगा ।
पिता घर में
(१) उपरोक्त योगों में सूर्य स्थिर राशि में लग्न से ८, ९, ११, १२ राशि,में हो
ओर लग्न पर चन्द्र की दृष्टि हो तो, अथवा ५
(२) लग्न को चन्द्र देखे तो पिता.घर में था ।
पिता की मृत्यु के बाद जन्म--लग्न से दुसरे घर में राहु बुध, शुक्र, शनि, सूर्य हों तो
पिता की मृत्यु के बाद जन्म हुआ और बालक अल्पायु होगा ।
जन्म समय पिता को बन्धन :
क्रूर ग्रह क्रूर राशि में सूर्य से ५, ७, ९ भाव में हो तो पिता बंधन में होगा ।
यदि यह सूर्य चर राशि में हो तो पिता परदेश में बॅघा (कंद)
यह सूर्य स्थिर राशि में हो तो पिता स्वदेश में बंधा (कैद)
यह सूर्य दिस्वभाव राशि में हो तो पिता मागं में वेधा ( कैद)
उपसूतिका (दाई) आदि का विचार आगे दिया है उसका कारण यह है कि जब
लग्न में संदेह हो या सन्धि गत लग्न हो या जन्म समय ठोक न मालूम हो तो यहाँ
बताई बातों पर विचार कई प्रकार से करके लग्न का निश्चय करना ।
उपसूतिका संख्या
जचकी कराने के निमित्त जो स्त्रियां वहाँ उपस्थित हों उनको उपसूतिका या दाई
कहते हैं । जचकी कराने वाली स्त्रियों का केवल यहाँ विचार है इनके अतिरिक्त घर में
ओर भी कई स्त्रियां हों उनका विचार नहीं है ।
(१) रन से २, ४, १०, १२ घर में जितने ग्रह हों उतनो उपसूतिका होंगी ।