सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 236, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें२२० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड
(र) यदि वहाँ कोई ग्रह न हो तब चन्द्र और लग्न के बीच जितने ग्रह हों उतनो
होंगी ।
(३) एक स्थान में बहुत ग्रह हों तो बहुत स्त्रियां होंगी ।
(४) या इनमें कोई ग्रह उच्च स्वगृहो आदि हो तो मी बहुत स्त्रियाँ होंगी ।
(५) या उपरोक्तस्यान के स्वामी के साथ जो ग्रह हों उतनी स्त्रियां होंगी ।
(६) या लग्न में या लग्नेश के पास जितने ग्रह हो उतनी स्त्रियां होंगी ।
(७) अन्य मत से--
लग्न राशि १, १२ | २, ११ | २, ९ | इ, ७ | शेष ३, ५, ८, १० राशि हो
स्त्री ३ x ५ ७ ३
अन्य मत--लग्न राशि १, १२ | २, १२ | ४, ह
" २
(८) अन्य बिचार--उपरोक्त ग्रहों में से वक्रगति उच्च में ग्रह हो तो संख्या तिगुनी
करना । स्वराशि, स्वनवःश, स्वद्रेष्काण में हो तो संख्या दुगुनी करना । नोच अस्त ग्रह
हों तो आधा करना । ग्रह वक्र उच्च हो ब कोई स्वांश आदि में भी हो तो १ बार ही
तिगुना करना ।
कितनी स्त्री कमरे में कितनी बाहर थीं--दृश्य चक्र में जितने ग्रह हों उतनी
स्त्री घर के बाहर, अदृश्य चक्र में जितने ग्रह हों उतनी स्त्री कमरे में होंगी ।
दृश्य अदृश्य चक्र पहिले समझा चुके हैं । छगन के भोग्यांश, व्यय, लाभ, दशम,
अष्टम व सप्तम भाव का मुक्तांश दृश्य भाग है दोष अदृष्य भाग है ।
उपसुतिका की जाति
(१) लगन से २, ४, १०, १२ घर में जितने ग्रह हों उम ग्रहों से जाति दिखाकर
बुष, गुरु शुक्र ग्रह हो तो ब्राह्मणी, सूर्य से क्षत्रिय, शनि से शुद्र, राहुकेतु से हीन जाति
की । अन्य ग्रह से ग्रह को जाति वाली ।
(२) यदि सौम्य ग्रह हो तो सघवा, पाप ग्रह से विधवा, बुघ, शुक्र, से क्वारी,
अन्य ग्रह से वृद्धा जानो । शुभ ग्रह से सुन्दर, पाप ग्रह से मलिन, मिश्र से मिश्रित । गुरु
शुक्र से बाल बच्चे वाली ।
(३) शुम ग्रह से ब्राह्मणी, ये पापांक में हों तो विधवा ब्राह्मणी। राहु केतु के
संयोग से विघवा सुन्दर स्त्री, शनि के संयोग से कुरूप कृपण, कुबडी विधवा 1
(४) अन्य मत ë २, ४, १०, १२ भाव के स्वामी के साथ जो ग्रह हों उनसे स्त्रियों
को जाति समझना ।
उपसूतिका का वर्ण, रूप आदि
- उपरोक्त उपसूतिका सूचक ग्रहों के विचार से ग्रह का रूप वर्ण आयु आदि का बिचार करना ।
प्रसूति के पहिले माता ने क्या भोजन किया था
इसका विचार चतुर्थेश से होता है 1