सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 237, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंनिषेक अध्याय : २२१
चतुर्थेश सूर्य हो--कठिन (सख्त) भोजन, मीठा और रूखा पदाथ ।
» चेन्द्र हो मीठो--पतली चाटने योग्य पदार्थ चटनी, आदि और कोमल
पदार्थं
. „ मंगल हो--सूखा, खट्टा, गुड, दुघ आदि।
१२ बुघ हो-जनेक प्रकार का स्वल्प भोजन, थोड़ा भोजन, खिचड़ी आदि ।
२ ` गुरु हो--बहुत रस वाले भोजन, पीने योग्य मधुर और ठंडा पदाथ ।
¬ शुक्र हो--उंडी मीठी पीने वाली चीज शर्बत आदि ।
„ शनि हो--मोटा अन्न, कदन्न-कोदों आदि या झगड़े के साथ मिला हो ।
अन्य मत-छर्न सूयं मंगल युत या दृष्ट--गुड़ या गुड़ के बने पदार्थ ।
लग्न चंद्र गुरु शुक्र या दुष्ट--दावकर या शक्कर के बने पदार्थ ।
लग्न केतु शनि युक्त या दृष्ट--कडवे या नमकीन पदार्थं 1
सब ग्रह दूध के भोजन का संकेत कर सकते हूँ ।
सूतिका वस्त्र
(१) लग्न राशि के अनुसार वस्त्र
मेष--लाल मिथुन--गुलाबी
aq— कर्के--बादल के समान रंग
सिह--पीला घन--पीछा
कन्या--सफेद मकर--काला
तुला--चित्रविचित्र कुंम--कबरंला वस्त्र
वृद्चिक--काळा सीन-साफ वस्त्र
(२) लग्न में जो नवांदा हो उसके स्वामी के अनुसार माता का वस्त्र कहना जैसे--
सूयं--पुराना और दृढ़ गुरु--बहुंमूल्य
चद्र--शवेत नवीन शुक्र- चित्र विचित्र
मंगल--लाल दग्ध मोर फटा शनि--मैला पुराना
बुघ--*गीन राहु,केतु--मैला पुराना
अन्यमत लग्न में ये ग्रह हों तो--सूर्य मंगल-लाल घारी या लाल बुन्दकी वाला
वस्त्र, चन्द्र शुक्र-दवेत वस्त्र, राहु केतु-पुराना फटा पेवन लगा ।
बुघ-ःहरा गुरु--पीला
सूतिका बिस्तर--जो ग्रह लग्न को देखे उस सरीखा वस्त्र ओर विस्तर ।
प्रसूता की चूड़ियां--छग्न से ७ भाव के भीतर जितने ग्रह हों दाहिने हाथ में
उतनी चूड़ियां। रग्न से ७ से १२ भाव के भीतर जितने ग्रह हों बां हाथ में उतनी
चुड़ियाँ। $ फी