सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 239, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंनिषेक अध्याय : २२३
'घर.में;सूतिका घर का स्थान कहां था उसकी दिशा
छर (लग्न) ` ३ राशि लग्न में १-२ राशिच्त्रर से पूवे में ।
हरन में ३ रापिस्तर से आग्नेय ।
लग्न में ४-५ राशिन्धर से दक्षिण ।
लग्न में ६ राशिन्घर से नैऋत्य 1
लग्न में ७-८ राशिज-घर से परिचम ।
लग्न में ९ राशिन्धर से वायव्य ।
लग्न में १०-११ राशिन्धर से उत्तर ।
लग्न में १२ राणिच्धर से ईशान में ।
लग्न में १, ४, ७, ८-११ राशिन्पूर्व में ।
लग्न में ५-१० राशिम्दक्षिण में ।
लग्न में २ राशि-पदिचम में ।
लग्न में ३, ६ ९-१२ राशिन्न्ठत्तर में ।
या.सूति गृह के इन दिशाओं में जन्म हुआ 1
यहाँ लग्न द्वितोय स्थान को रागि में=
सिरहाना ।
सप्तम अष्टम की राशि में-्मांयता ।
१०-११ भाव की राशि में-्ब्राई पाटी ।
४-५ भाव की राशि मेंन्दाहिनी पाटी ।
३-१२ भाव की राशि में=सिरहाने के पाये
६-९ भाव की राशि मेंन्यांयते के पाये।
उपरोक्त प्रकार से खाट की स्थिति होगी । जिस घर में पाप ग्रह हो उसी पावा
को टूटा या फटा 1 शुभ-अशुभ दोनों प्रकार के ग्रह हों तो कोई नया कोई पुराना होगा ।
'वाप ग्रह वलवान् हों तो पाया टूटा नहीं होगा ।
द्विस्वमाव राशि जहाँ हो वहाँ कच्ची लकड़ी या कील होगी या डेढ़ापन होगा ।
अन्यमत--जिस दिशा में राहु हो उस दिशा में qz होगी । लग्न में मंगळ हों तो
` खाट का पाया टूटा । “
सूतिका गृह का दुवार
(१) छल या लग्न के नवांश में जो राशि हो उसके अनुसार प्रसव गृह का द्वार होगा ।
१-४-७-८-११ राशि या इनका नवांश लग्न में हो--पूर्व ।
९-१२-३-६ राशि या इनका नवांश लग्न में हो- उत्तर ।