भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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निषेक अध्याय : २२३

'घर.में;सूतिका घर का स्थान कहां था उसकी दिशा

छर (लग्न) ` ३ राशि लग्न में १-२ राशिच्त्रर से पूवे में ।

हरन में ३ रापिस्तर से आग्नेय ।

लग्न में ४-५ राशिन्धर से दक्षिण ।

लग्न में ६ राशिन्घर से नैऋत्य 1

लग्न में ७-८ राशिज-घर से परिचम ।

लग्न में ९ राशिन्धर से वायव्य ।

लग्न में १०-११ राशिन्धर से उत्तर ।

लग्न में १२ राणिच्धर से ईशान में ।

लग्न में १, ४, ७, ८-११ राशिन्पूर्व में ।

लग्न में ५-१० राशिम्दक्षिण में ।

लग्न में २ राशि-पदिचम में ।

लग्न में ३, ६ ९-१२ राशिन्न्ठत्तर में ।

या.सूति गृह के इन दिशाओं में जन्म हुआ 1

यहाँ लग्न द्वितोय स्थान को रागि में=

सिरहाना ।

सप्तम अष्टम की राशि में-्मांयता ।

१०-११ भाव की राशि में-्ब्राई पाटी ।

४-५ भाव की राशि मेंन्दाहिनी पाटी ।

३-१२ भाव की राशि में=सिरहाने के पाये

६-९ भाव की राशि मेंन्यांयते के पाये।

उपरोक्त प्रकार से खाट की स्थिति होगी । जिस घर में पाप ग्रह हो उसी पावा

को टूटा या फटा 1 शुभ-अशुभ दोनों प्रकार के ग्रह हों तो कोई नया कोई पुराना होगा ।

'वाप ग्रह वलवान्‌ हों तो पाया टूटा नहीं होगा ।

द्विस्वमाव राशि जहाँ हो वहाँ कच्ची लकड़ी या कील होगी या डेढ़ापन होगा ।

अन्यमत--जिस दिशा में राहु हो उस दिशा में qz होगी । लग्न में मंगळ हों तो

` खाट का पाया टूटा । “

सूतिका गृह का दुवार

(१) छल या लग्न के नवांश में जो राशि हो उसके अनुसार प्रसव गृह का द्वार होगा ।

१-४-७-८-११ राशि या इनका नवांश लग्न में हो--पूर्व ।

९-१२-३-६ राशि या इनका नवांश लग्न में हो- उत्तर ।