भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२२४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड

२-राशि या इसका नवांश लग्न में हो--पद्चिम । .

५-१० राशि या इनका नवाँश लरन में हो--दक्षिण ।

(२) एक ही दिशा लग्न और लग्न नवांश से आती हो तो ठीक वहीं द्वार होगा । यदि दोनों

में भिन्नता हो तो लग्न व नवांश में जो बली है उसके अनुसार लेना ।

(३) अन्यमत--लग्न में प्रथम द्रेष्काण--नवमेश जिस राशि में हो उस राशि की दिशा

में द्वार । लग्न में द्वितीय द्रेष्काण--लग्न में द्वादश राशिका स्वामी राशि कीं

दिशा में द्वार । लग्न में तृतीय द्रेष्काण--लग्न से पंचम राशि का स्वामी राशि

की दिशा में द्वार ।

(४) जो ग्रह केन्द्र में हो उसकी जो दिशा है उस गोर द्वार, केन्द्र में बहुत ग्रह हों तो

बलवान्‌ ग्रह से दिशा का विचार करना । केन्द्र में कोई ग्रह न हों तो लग्न की राशि

या ल्मन द्वादशांश की राशि से, इनमें मुख्य बलवान्‌ ग्रहों Š विचारना ।

(५) छन सिंह हो--तो जन्म गृह के २ द्वार । लग्न कन्या हो--तो जन्म घर कष्टकर

खराब हो गरीब घर होगा ।

(६) उपरोक्त qg दृश्याद्ध में होवें तो उस दिशा के वाम भाग में द्वार होगा ।

उपरोक्त ग्रह अदृक्याद्धं में होवें तो उस दिशा के दक्षिण भाग में द्वार होगा ।

  • यहाँ कई प्रकार से विचार दिया ë जिससे अधिक मिले वही लेना ।

दीप विचार

दीप की दिशा--जैसे खाट के अंग का विचार है उसी प्रकार सूये से दीपफ का

स्थान जानना ।

(१) सूर्य की राशि जिस.दिशा में है उसी दिशा में दिया (दीपक) होगा । या सूर्य

< पहर आठों दिशाओं में घूमता हे उस समय सूयं जहाँ हो वहाँ दिया होगा । दीप-तेल-बत्ती पर विचार '

सूर्य युक्त राशि- दीप ज्ञान । चन्द्र से--त्तेल ज्ञान । लग्न से--बत्ती ।

दीप-¬(१). लग्न चर--दीप चंचल हाथ से चलता फिरता या एक जगह से

दूसरी जगह को धरा गया ।

(२) लग्न स्थिर--दीप स्थिर एक ठिकाने ।

(३) द्विस्वभाव--दीप हाथ में हो होगा या चलित ।

दीप का अन्य विचार

(१) स्य राशि चर--जन्म समय हो दिया लाया गया या एक जगह से दुसरी'

जगह घरा गया । š

सूर्य स्थिर--दिया जन्म के पहिरे था या एक जगह दिया स्थिर था 1

सूर्य द्विस्वभाव--दिया दूसरे ठिकाने था या चलित था । (२) जन्म से सूर्य बलवान्‌ हो और उसे मंगल देखे तो वहां घर में बहुत दीप हो ।

या सूर्य बलवान्‌ हो तो--नवोन बहुमूल्य दीपक हो ।