सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंनिषेक अध्याय : २२५
या सूर्य निवल हो तो-टूटा फूटा दीप हो यहाँ बल विचार कर कहना ।
:(३) घास फूस की रोशनी--अन्य ग्रह बली होकर व्यय भाव में हों तथा उन पर
शनि को दृष्टि हो तो घास फूस आदि निम्न प्रकार से प्रकाश हो ।
दिया का मुख जन्म समय में
सूयं १-५-९ राशि के नवांश में हो--दिया का मुख पूर्व ।
सूर्य २-६-१० राशि के नवांश में हो--दिया का मुख दक्षिण ।
सूर्य ३-७-११ राशि के नवांश में हो--दिया का मुख पदिचम ।
सूये ४-८-१२ राशि के नवांश में हो--दिया का मुख उत्तर ।
दीपक में तेल
` चन्द्र के अनुसार विचारना--
(१) चन्द्रमा प्रथम द्रेष्काण में-तेल भरा । चन्द्रमा द्वितीय द्रेष्काण में-तेल आधा ।
चन्द्रमा तृतीय द्रेष्काण में बहुत कम ।
(२) इसी प्रकार चन्द्र राशि से भी विचारना--राशि के आरम्भ में तेल भरा ।
मध्य में आवा । अन्त में--बहुत कम या खाली ।
(३) पूर्ण चन्द्र हो--जन्म समय दिया भर तेल था। क्षीण चन्द्र हो--थोडा तेल ।
चन्द्र के साथ पाप ग्रह--बहुत सूक्ष्म तेल । š
बत्ती
लग्न के अनुसार बत्ती--
(१) जन्म लग्न के आरम्भ में--बत्ती दिखे में पूर्ण । जन्म लग्न के मध्य में--बत्ती
दिये में आधी । जन्म लग्न के अन्त में--बत्ती दिये में थोड़ी ।
(२) बत्ती का रंग--लग्न की राशि का जैसा रंग हो उसी के अनुसार ।
खाट दिया घर आदि पर विशेष विचार
प्रसव कहों-कहीं दो मंजिला, तीन मंजिला घर या कहीं भूमि में होता है भोर दिन
में बिना दीपक के प्रकाश रहता है दीप की आवश्यकता नहीं दै इत्यादि बातों पर जाति
कुल, देश की रीति आदि पर वृद्धि से विचार कर कहना चाहिये ।
बालक को किस दशा में ले जाना मना है
अर्थात् आपत्तिजनक दिशा--जन्म समय-जन्म नक्षत्र के चरण परमे वगंका
विचार करना ।
अ वर्ग-वायब्य, क वर्ग--उत्तर, च वर्ग--ईशान, ट वर्ग --पूर्व, त वर्ग-आग्नेय,
प वर्ग--दक्षिण, य वॉ--नैऋत्य, श वर्ग--पदिचम 1
इन निम्न वर्ग वालों की इन दिशाओं में बालक को ले जाना मना ह । ८ मील से
अधिक दुर इन दिशाओं में नहीं छे जाना ।
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