सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 261, कुल 418 में से
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युग संवत्सरादि फलाध्याय : २४५
६ शुक्रवार-शरीर निरोग रहे--आयु ६० वर्ष । ७ शनिवार--भ्रथम मास, १३ वें ओर १८ वें वर्ष में पीड़ा होती हुँ, आयु १०० वर्ष। `
यहाँ केवळ वार जन्म के अनुसार आयु बताई गई है; परन्तु कुंडली में प्रह स्थिति के अनुसार अनेक योग बनने से अल्पायु दीर्घायु आदि योगों के कारण उपरोक्त आयु में बहुत अन्तर पड़ जाता है ।
नक्षत्र जन्मफल
१. अष्विनी--सुन्दर रूप, भूषण श्यंगार में रुचि, बुद्धिमान, सुखी, चतुर, निपुण, शरीर पुष्ट, धनवान, लोकप्रिय, भाग्यवान, स्त्री पुत्र भूषण आदि से सन्तुष्ट, नग्न, सदा सेवा करने वाला, विनय और ज्ञानयुक्त ।
२. भरणी--निरोग, सत्यवक्ता, दृढ्व्रती, सुखी, धनवान, चतुर, विनोदी,,जल से भयमान, चपळ, खल स्वभाव, क्रूर, कृतघ्न, किसी काम फो आरम्भ कर पुरा करने वाला, कभी यश, कभी निन्दा प्राप्त ।
३. कृत्तिका--बहुत भोजन करे, कृपण, पापी, पर स्त्री में प्रेम, तेजस्वी (किसी की
बात न सहे), दुष्टकर्मी, व्यर्थ श्रमण, सत और घन रहित, कठोर वचन ।
४, रोहिणी--सत्य भाषी, मीठी बोली, रूपवान, घनी, कृतज्ञ, बुद्धिमान, राज्य
मान्य, कृषि कमं प्रिय, ज्ञानी, परछिद्रान्वेषी, अर्थ कमं में कुशल ।
५. मृगणिर--चंचळ, चतुर, उद्यमी, योगवान, घनवान, चतुरवाणी, अहंकारी,
स्वार्थी, द्वेषी, कपटी, धीर रोगी, यात्रा प्रिय, कुटिल दृष्टि, कुकर्मी, घनुविद्या के अस्यास
में तत्पर, राजा से स्नेह प्राप्त ।
६. आद्रो--गव॑ युक्त, शठ, पापरत, कृतघ्नी, पर कायं बिगाड़ने वाला, भूखा,
क्रोधी, अभिमानी, धन घान्य पै हीन, जीवघाती, भाइयों का प्यारा, दरिद्र, अमणशील ।
७. पुनवेसु--सुखो, अच्छा स्वभाव, रोगी, तृष्णायुषत, थोड़े लाभ में सन्तुष्ट, लोकप्रिय, पुत्र मित्रादि युक्त, बहुत मित्र, स्वर्ण आभूषण युक्त, दानी, धनवान, शास्त्रअभ्यासी, कवि ।
८. पुष्य--शान्त इन्द्रिय वाला, सर्व प्रिय, धनवान, घमं में तत्पर, देव ब्राह्मण प्रिय,
कुटुम्ब युक्त, चतुर, शान्त प्रकृति, प्रसन्नदेह, विनय युक्त, माता-पिता का भषत, पास्त्राथं
जानने घाला, घन वाहन युक्त | :
९, आइलेषा--सव॑ भक्षी, क्रोधी, कृतघ्न, ठग, खळ, व्यर्थ भ्रमण, व्यर्थ कष्ट देने
वाला, घन को व्यथं खर्च करे, काम कला से दुःखित चित्त, मोटी बुद्धि ।
१ चरण में जन्म-कल्याण करनेपाळा, २ चरण में जन्म--घन का नाशक,
३ चरण में जन्म-माता को पीड़ा देने वाळा, ४ चरण में जन्म-पिता को पीड़ा देने
||
छ १०. मघा--अनेक नौकर, बड़ा कुदुम्ब, घनवान, भोगी, देव पितरों का भक्त,
उद्यमी, महंकारी, स्त्री के वश, राज सेवक, पिता भक्त, कठोर चित्त, श्रेष्ठ बुद्धि, शत्रु
नाशक ।