भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२४६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

११. पूर्वाफाल्गुनी-- प्रिय वाणी, उदार, भ्रमणशील, राजसेवा में तत्पर, सुखी,

स्त्री को प्रिय, विद्या, गौ, घन युक्त, गम्भीर स्वभाव, सुखी, शूरवीर साहसी, बहुत

नौकरों वाला, चतुर, घूतं, उग्र, अभिमानी, काम से दुःखी, पंडितों से पूज्य ।

१२. उत्तरा फाल्गुनी--सर्व प्रिय, विद्या द्वारा घनवान, भोगी, सुखी, दानी, वीर,

इन्द्रिय जित, मृदु वाणी, सुशील, कोतिवान, धैय वान, धनुर्वेद आदि फा ज्ञाता, कृतज्ञ,

पाण्डत ।

१३. हस्त--निर्लज्ज, उद्यमी, मद्य पोने वाला, चोर, पर स्त्री गामी, देव ब्राह्मण

पूजक, बन्धु रहित, दानी, सम्पत्तिवान, घृष्ट, झूठा, उपकारी ।

१४. चित्रा--स्त्री पत्नी युवत, धनधान्य युक्त, सदा प्रसन्न, देव ब्राह्मण भवत, नीति

š चतुर, विचित्र वस्त्र पहिनने वाळा, पुष्पपाळा घारण करनेवाला, शत्रु पीडक ।

१५. स्वाती--दयावान, उदार, व्यापारी, प्यारी वाणो, घनी, देव ब्राह्मण प्रिय,

घामिक, कृपण, राजा से वैभव प्राप्त, थोड़ा धन, स्त्रियों से अधिक प्रीत, सुशील,

मन्द बुद्धि ।

१६. विशाला-ई्ष्यालू, लोभी, कलह प्रिय, अहंकारी, क्रोधी, स्त्री के वश,

अभिमानी, निष्ठुर, वेश्या प्रेमो, बोलने में चतुर, किसी का मित्र नहीं, उम्र और

सोम्य स्वमाव ।

१७, अनुराघा--घनवान, परदेश वासी, भ्रमण शीळ, अति क्षुघातुर, प्रिय वचन,

यशस्वी, पुरुषार्थी, ढीठ, बंधु कार्य में सदा उद्धत, शत्रुजित, कला में प्रवीण, उद्यमी,

प्रसन्न चित्त ।

१८. ज्येष्ठा-संतोषी, धर्मज्ञ, क्रोधी, घमं रत, दानी, निपुण, घनवान, प्रतापी,

बोलने में चतुर, श्रेष्ठ प्रतिज्ञा, शूद्रो से पूजित, पर्‌ स्त्री प्रेमी ।.

, १९. मूल--दानी, धनवान; शत्रु हुता, उपकारी, मोगी, विचारवान, हिंसक, बली,

चतुर्‌ 'बचन, धूतं, कृतष्न, वाहन युक्त, अभिमानी ।

अभुक्त मूल में--नड़ से कुछ का नाश करता है । अभुक्त मूल न हो तो सौभाग्य

और आयु वर्धक होता है ।

मूल के पहिले चरणं में--पिता को पीड़ा। दूसरे चरण में-माता को पीड़ा । तीसरे

चरण में-घन हीन । चौथे चरण में-सुख सम्पदा प्रद ।

२०. पूर्वाषाढ़ा-सुखी, शांत बुद्धि, भाग्यवान, जन प्रिय, कार्य निपुण, धनवान,

बार-बार जल पिये, भोगी, शोछवंत, उपकारी, सुखी, श्रेष्ठ वाणो, अच्छे मित्र ।

२१. उत्तराषाढ़ा--नत्र, धर्मात्मा, बहुत मित्र, गुणज्ञ, सुखी, धनवान, कृतज्ञ,

विजयी, श्र वीर, विनयी, दानी, दयावान, अभिमानी, स्त्री पुत्र युक्त, पंडित,

मान्य, शांत ।

२२. अभिजित--विनीत, यशस्वो, गुणी, स्पष्टवक्ता, देव ब्राह्मण मक्त, कुटुम्ब में

श्रेष्ठ, मनोहर कांति, सज्जनों द्वारा मान्य ।