सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 263, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंrr —— ankFnIea=aeə rT
युग संवत्सरादि फलाध्याय : २४७
२३. श्रवण--घनवान, विख्यात, कृतज्ञ, गुणी, बहुत संतान, बहुत मित्र, आरोग्य,
बलवान, शत्रु को जोतने वाला, दानी, सत्पुरुषों का संग, शास्त्र प्रेमी, घर्मवान, देव ब्राह्मण भक्त ।
२४. घनिष्श--श्रवीर, धनी, गानप्रिय, घन का लोभी, वंधु मान्य, भूषण युक्त;
सैकड़ों का स्वामी, शीलवान, आचार युक्त, दयालु, सुखी, आशावान ।
२५. शतभिषा--स्पष्ट वाणी, अनेक व्यसन, शात्रुहंता, साहसी, कृपण, धनवान,
पर स्त्री प्रेमी, शीत से भय, कठोर चित्त, चतुर, विदेश में अधिक, काम चेष्टा, अल्प
भोगी, शांत ।
२६. पूर्वाभाद्रपद--उद्विग्न मन, स्त्री के वश, कृपण, धन कमाने मॅ चतुर, सुखी,
यक्ता, संतति युक्त, बहुत सोने वाला, सब कलाओं में चतुर, निरर्थक दुःख भी प्राप्त
हो, शत्रु जित, धूर्त, भयवान, तेज वचन । : :
२७. उत्तरा भाद्रपद--सुखी, संततिवान, धर्मात्मा, शत्रुजित, धैर्यवान, साहस
गुणी, पूज्य, स्वकुल में भूषण, धनवान, शुभ कमं कर्ता, पंडित ।
२८. रेवती--संर्व अंग परिपूर्ण, शूरवीर, धनवान, पथिक, पुत्र स्त्री मित्र युक्त,
चतुर, साधु, बुद्धिमान, विचार करने वाला, शीलवान ।
२७ योगफल
१. विष्कुभ--रूपवान, भाग्यवान, अलंकार युक्त, बुद्धिमान, चतुर, धनवान, पशु
युवत, शत्रुजित, स्त्री पुत्र मित्र का सुख प्राप्त, स्वाधीनता प्रेमी ।
२. प्रीति--स्त्रियों का प्यारा, तत्वज्ञानी, उत्साही, वाचाल. सम्पत्तिबान, प्रसन्न
चित्त, दानी, विनोदी, स्त्री के वश, उद्यमी । š
३. आयुष्मान--दीर्घायु, निरोग, घनी, साहसी, मानी अभिमानी, कवि, विजयी,
अनेक स्थान एवं जंगल घूमने का इच्छुक ।
४. सौभाग्य- ज्ञानवान, सुखी, धनवान, आचारवान, बलवान, सौभाग्य युक्त,
अभिमानी, निपुण, स्त्रियों का प्यारा, राजा का मंत्री ।
५. शोभन--भोगी, गौरव युक्त, श्रेष्ठ बुद्धि, पुत्र स्त्री युक्त, युद्ध में उत्सुक, सबी
कार्यों में आतुर, शुभ कायं में तत्पर, वध करने में रुचि । '
६. अतिगंड--घनी, अभिमानी, क्रोघी, कलह प्रिय, धूर्त, पाखण्डी, मातृ हंता, गले
में बीमारी, विशाल हाथ पैर, बडी ठोड़ी, अति गंड के अंत में जन्म- फुलका नाशक हो |
७. सुकमं--अच्छे कमं करने वाला, सुशील, सबसे प्रेम, गुणी, भोगी, प्रसन्न चित्त
पराक्रमी, उपकारी, आचारवान ।
८. धृतिमान (घृति)--धनवान, भाग्यवान. सुखी, गुणवान, विद्यावान, शीलवंत,
नीतिवान, सभा में चतुरता युक्त बोछने वाला, पर स्त्री के घन से घनी ।
९, शूल--दरिद्र, रोगी, क्रोधी, कलहकारी, कभी-कभी शूल का रोग, शास्त्रज्ञ,
विद्या और द्रव्य में कुशल ।
१०. गंड--दुराचारी, गलगंड रोगी, क्लेश' भोगो, योगी, शूर वीर, दृढ़ प्रती,
कठोर स्वभाव, क्रोधी, बड़ा सिर, हृस्व देह, बहुत मोटा ।