भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२४८: ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

११. वृद्धि-क्रयःविक्रय के काम से धनवान, दीर्घायु, पुत्र मित्र युक्त, भोगी,

बलवान्‌, पराक्रमी, सब्र चीजों के संग्रह में चतुर, पंडित के सदृश बोलने बाला, नियम

से भाग्य की वृद्धि करने वाला ।

१२. ध्रुव--दीर्घायु, विशेष घनी, कीर्तिमान, सवे प्रिय, स्थिर बुद्धि, स्थिर कमं

करने वाला, मुख में सरस्वती का वास ।

१३. व्याघात--क्रूर स्वभाव, घातक, दया हीन, असत्य में प्रीत, सब कामों में

चतुर ओर लोक प्रसिद्ध, झूठा विवाद करने वाला ।

१४. हर्षण- ज्ञानी, बड़े यश वाला, शास्त्र प्रेमी, शत्रु नाशक, प्रसन्न वित्त,

घनवान, भाग्यशाली, ढीठ, सुन्दर आभूषण, लाल वस्त्र पहिरने वाळा ।

१५. वज- धनी, कामी, गुणदान, सुन्दर बुद्धि, पराक्रमो, रत्न परीक्षक, रत्न युक्त

आभूषण और वस्त्र, बली, घन धान्य युक्त, अस्त्र विद्या में पारंगत, वप्त्रसम कड़ी मुट्ठी ।

१६. सिद्धि--ठदार चित्त, चतुर, शीलवंत, शास्त्र का ज्ञाता, बली, भाग्य की

वृद्धि, सवं सिद्धि युक्त, सुखी, दाता, रोगी, सर्व का आश्रित, दानी 1

१७. व्यतीपात--मायाधी, उदार, माता पिता की आज्ञा पालक, कठोर चित्त,

रोगी, पराये कायं को विगाहे ।

इसमे उत्पन्न बड़े कष्ट से जीता है यदि जीता रहे तो उत्तम मनुष्य होता है ।

१८. बरियान--भोगी, नम्र, थोड़ा घन, श्रेष्ठ कार्य में खच, काव्य कळा गीत

नृत्य का ज्ञाता, श्रेष्ठ कारीगर ।

१९. परिघ--विद्वेषी, घनी, झूठ वक्ता, दयाहीन, चतुर, अल्प भोजन, Frda,

शत्रुजित, दानी, भोगी, कवि, वाचाल, प्रियमाषी शास्त्रज्ञ, कुल की उन्नति

करने वाला ।

२०. शिव--शास्त्रज्ञ, घनी, राजा का प्रिय, मंत्र शास्त्रज्ञ, महाबुद्धि, कल्याण का

भाजन, जितेन्द्रिय, संसार में पुज्य ।

२१. सिद्धि--इस्द्ियजित, चतुर, गौरव युक्त, जो कार्य करे सब सिद्ध हो, मंत्र

सिद्धि वाला, सम्पत्ति ओर दिव्य स्त्री युक्त, घर्मी, यज्ञ प्रेमी ।

२२. साध्य--नम्र, हास्य युक्त, कार्य में चतुर, शत्रुजित, मंत्र विद्या का ज्ञाता,

मानसिक सिद्धि युक्त, सुखी, सबका मित्र, यशस्वी, आळसी, शुभाचरण, प्रसिद्ध ।

२३. शुम--श्रेष्ठ वाणी, शुभ कर्म कर्ता, wal, घर्म, दानी, विज्ञानी, ज्ञानी, दाता

ब्राह्मण पूजक, चंचल अंग, कामी, कफ प्रकृति ।

२४, शुक्ल--सत्य भाषी, पराक्रमी, विजयी, सम्मान प्राप्त, कलाविद, सर्व प्रिय,

घनी, कवि, प्रतापी, क्रोधी, चतुर वचत, घमं में तत्पर, पंडित, इन्द्रियजित ।

« २५. ब्रह्म--विद्या अध्ययन में प्रेम, सत्याचार वाळा, सुन्दर कमं, आदरणीय,

विद्वान, शास्त्रज्ञ, सब काम करने में कुशल, छिपा हुआ विदोष घन, श्रेष्ठ विवेकी ।

२६. ऐन्द्र- चतुर बलवान्‌, घनबान, पराक्रमी, कफ प्रकृति, अपने वंदा में श्रेष्ठ

हल्पायु परन्तु सुखी, गुणवान, भोगी, बुद्धिमान, उपकारी । ०