सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 265, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंयुग संवत्सरादि फलाध्याय : २४९
२७. वैधृति--चंचल, चुगल, मायावी, परनिदक, धनी, ' दुष्टों से मित्रता, शास्त्र
भक्ति से रहित, उत्साह हीन, प्रीति करने पर भी मनुष्यों का अप्रिय ।
करण जन्मफल
१. बव--कामी, दयालु बलवान, शीलवंत, चतुर, भाग्यवान, अनेक सम्पत्तिवान,
अभिमानी, घमं रत, प्रतापी, शुभ मंगल कार्यं कर्ता, बालकवत् काम करने वाला ।
२. बालव--शूरवोर, बलवान, विलासी, दानी, बुद्धिमान, कलाविद, काव्य प्रेमी,
विद्या और द्रव्य युक्त, तीर्थ और देव सेवक, राजा से मान्य, चरित्रवान ।
३. कौलव--बुद्धिमान कामी, जन प्रिय, बहुत मित्र, बलवान, कोमल वाणी, सुन्दर
चरित्र, वाहन युक्त, स्वाधीनता को प्राप्त ।
४. तैतिल--हास्य विलास में प्रीत, वाणी विलास में चतुर, शीलवंत, बुद्धिमान,
चचल नेत्र, सबसे स्नेह, पुण्यात्मा , सौभाग्य और गुण युक्त, धनवान, विचित्र घर में
रहने वाला ।
५, गर--परोपकारो; विचारशील, शत्रुजित, शूरवीर, धैयंवान्, उदार, कृषिःप्रेमी,
कायं में निपुण, उद्यम से अभीष्ट वस्तु प्राप्त हो, प्रतापी, शत्रु रहित 1
६. वाणज--कला में प्रवीण, हास्य युक्त, चतुर, सन्मानी, व्यापार से घन पैदा
करे, देशान्तर गमन, वक्ता, विनयी, चंचळ, इच्छित वस्तु प्राप्त ।
७, विष्टि--दुष्ट बुद्धि, बहुत सोने वाला, शत्रु नाशक, अशुभ कार्य आरम्भ करने
चाला, विष कर्म में रत, पर को मारने में रत, पर स्त्री गामी, स्वतन्त्र, सवका विरोषी,
पापकर्मी, अपवादी 1
८. शकुनि-सुन्दर बुद्धि, मंत्र विद्या का ज्ञाता, शकुन जानने वाला, औषधि
आदि कर्म में निपुण, वैद्य, कालज्ञ, सुखी, मित्र युक्त, गुणी, सावधान ।
९, चतुष्पद--क्षीण शरीर, चौपायों के वळ वाला, गायों का रक्षक, चौपायो की
औषधि करने वाला, देव ब्राह्मण प्रेमी, अच्छी बुद्धि, यश, घनयुक्त ।
१०, नाग--खोटा स्वभाव, बलवान्, दुष्टात्मा, क्रोध से नष्ट बुद्धि, कलहकारी,
कुल का शत्रु, वैर से कुल का नाशक, संग्राम में घीर, दारुण कमं, चंचल नेत्र, तेजवान,
स्थावर से प्रीत । १
११. किस्तुघ्न--हास्यग्रिय, पर कार्य करने. वाला, चंचल बुद्धि, काम क्रीडा में
निर्बल, घ्म-अघमं में बराबर, मित्रता शत्रुता सदा अस्थिर, शुम कर्म में रत, तुष्टि,
मांगल्य और सिद्धि को प्राप्त ।
गण जन्म +
a १. FS + जे भोजो, विद्वान्, गुणी, बुद्धिमान्, दानी, घनवान्, श्रेष्ठ बोछी,
अल्पभोगी ।
२. मनुष्यगण--देव ब्राह्मण का पूजक, अभिमानी, दयालु, बलवान् षगवान्, कराः
बिद, सुखदायक, निशान बेघने वाला घनुर्घारी, सुन्दर नेत ।
३. राक्षसगण--बहुत बोलने वाला, उन्मादी, कठोर चित्त, साहसी, क्रोधी, कलह”
कारी, भयानक स्वरूप, बिरोधी, दुवंचन भाषी, प्रमेह रोगी ।