भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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युग संवत्सरादि फलाध्याय : २५१

२. वृष लग्न-छोक तथा गुरुजन का भकत, प्रिय, वक्ता, गुणवान्‌, पण्डित, घनी,

लोभी, शूरवीर, सवे प्रिय, कृषि कार्य में दत्त, युवतियों का प्रेमो, बालपने में दु:खी,

आयु के मध्य एवं अन्त भाग में सुखी, क्लेश सहन करने वाला, क्षमावन्त, गौ युक्त,

क्रोधी, कृतघ्न, मन्द बुद्धि, दूसरों से पराजय प्राप्त, शांत रूप, आहार बहुत, लोकप्रिय,

बहुत मित्र, संग्राम प्रिय, शान्त बुद्धि, दयालु, स्त्री का चाकर, अच्छा स्वभाव, देव पूजक,

धर्मे कर्म करने वाला, भ्रमणशील, श्वेत शरीर, कफाविक्य, चौड़ी जाँघ, बड़ा चेहरा,

पीठ, मुख या पाव में चिह्व या तिछ । घन कुटुम्ब आदि इसका नहीं रहे ।

बनचर, मंगल में रहे, वर्ण शुभ्र, स्वभाव सोम्य, वृषभ लग्न पृष्ठोदय, रात्रि बली

ë । दक्षिण दिशा में बलिष्ठ ये आग्नेय दिशा में है, स्थिर स्त्री संज्ञक है ।

३. मिथुन लग्न --अभिमानी, बन्धुजनो को प्रिय, त्यागी, भोगी, कामी, घनवान,

आलसी, शत्रुनाशक, स्त्रियों से क्रीडा का प्रेमी, नृत्य वाद्य प्रेमी, सदा घर में रहने वाला,

बहुत पुत्र मित्र वाला, श्रेष्ठशील, राजा के समीप वास, धीरे काम करने वाला, स्त्री का

अनुरागी, प्रसन्न चित्त, राजा से कष्ट पानेवाला, नम्न, प्रिय वचन भाषी, दयावन्त, गुणी,

तत्वज्ञ, योगात्मा, शास्त्र जाननेवाला, नौकरी करे, वुद्धिमान, जुआड़ी, नपुंसक की

संगति, भोगी ।

काली आँखें, घुघराले बाल, उठी, नाक, यह गौर वर्ण राशि गाँव में रहनेवाली,

हस्व, रात्रि बली, शीर्षोदय, पुरुष, क्रूर Gera, पश्चिम दिशा में बलवान, मुह

उत्तर को है, लाळ नेत्र ।

४. ककं लरत--भोगी, धर्मात्मा, लोक प्रिय, मिष्टान्न पान, भाग्यशाली, स्त्री के

अधिकार में, मित्रों से घिरा, बहुत घरवाला, धनवान, बुद्धिमान, अल्प संतान, Ts, जल￾बिहार, उदार, साथु संग, उल्टी बुद्धि, भाइयों का प्यारा, बोलने में प्रगल्म, क्षमाशीळ

कपट बुद्धि, पारी, पराया धन हरने वाला, उठे कूल्हे, ठिंगनाकद, वक्र दृष्टि, चलने में

तेज, गौर वर्ण, मिन्राधिवय, qg लग्न पृष्टोदय रात्रि बली, चर, स्त्री, सौम्य, उत्तर दिशा

में बलवान, वायव्य दिशा में मुंह है । ;

५. सिह--योगी, शत्रु हंता, छोटा पेट, अल्प संतान, उत्साही, रण में पराक्रमी,

अभिमानी, शीघ्र क्रोध होने वाला, दृढ़ मन, माता-पिता का आज्ञाकारी, अल्प भोजी,

मांस भक्षण में प्रीति, जंगल पहाड़ में जाना पसंद, बोलने में प्रगल्म, निश्चेष्ट, संतुष्ट,

हिंसक, शत्रुओं को जीतने वाला, कामी, परदेश में जाने वाला, राजा को वश में

करने वाला, देवकार्य में विघ्न करने वाला, दयालु, नोकर पर क्रोध, इच्छानुसार

बेसमय खाने-पीने लगे, लाल नेत्र, बड़े गाल, चौडा, चेहरा, पोत मिला श्वेत वर्ण, बात कफ से पीडित, तीक्ष्ण प्रकृति । यह लग्न शीर्षोदय, दिन बली, स्थिर, पुरुष, पूर्व में बली, कको

š कन्या लग्न- अनेक शास्त्रविशारद, गुणी, परंघन का भोगी, सत्यरत, प्रिय￾भाषी, भोग का प्रेमी, अल्प सन्तान, शास्त्र शाता, कामी, चतुर, प्रसन्न चित्त, कर

वदा, बुद्धिमान, सात्विक, बन्नु मिय, सुखो, स्त्री विलास का रसिक) मायावी, थीमंत,