भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 268, कुल 418 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 268

२५२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

लक्ष्मी को प्राप्त, बड़ी लज्जा वाला, बहुत कन्या संतति, थोड़े पुत्र, नृत्य वाद्य चित्र व

कला में कुशल, लोगों से घन मिले, दुसरे गाँव फिरे, सत्य भाषी, सुन्दर, कफपित्त युवत

प्रकृति, गम्भीर, शीतल दृष्टि, दीघं, शीर्षोद्य राशि, दिवावली, द्विस्वभाव, स्त्री, मृदु,

दक्षिण दिशा में बली, इसका मुह उत्तर पडे ।

७-तुला लग्ग--पंडित, सत्कर्मो से जीविका, विद्वान्‌, धनवान्‌, लोक पुजित, सब

क्ला का ज्ञान, अल्प सन्तान, ब्राह्मण देव पूजक, भ्रमणजील, व्यापार में चतुर, शूर,

निर्दय, अच्छे कर्म से जीविका, अच्छी बुद्धि, कुल में प्रकाशवान्‌, सत्य भाषी, राजा का

प्रिय, शान्त वृद्धि, विषादी, चंचल, डरपोक, विचारवान्‌, स्त्री वश्य, सभ्य, रोगो, कुटुम्ब

का उपकारी, भाइयों का निदक, दो नाम हों, ऊँचा कद, कफ की अधिकता, विरल

दाँत, नाक ऊँची, दुबला, अंगहोन, यह राशि शीर्षोदय, दिवावली, चर, पुरुष, पश्चिम

दिक्षा में वरिष्ठ, आग्नेय दिशा में मुह 1

८-वृद्चिक--शूरवीर, घनवान, पंडित कुल पूज्य, पूज्य बद्धिमान्‌, आरिम्मक जीवन

में रोगी, माता पिता गुरु से वियोग, क्रूर कर्म कर्ता, राजा से मान प्राप्त, सदा क्लेश को

प्राप्त, बुद्धि ज्ञान विज्ञान से युक्त, सुखी, क्रोधी, असत्य भाषी, शास्त्रकथा में निपुण,

शत्रुजित्‌, पर घन हरे, पर स्त्री से प्रेम, दीर्घायु, सुजनों का वैरी, विवाद प्रिय, सन्तान

से दुःखी, अपने कुल में मुख्य, गुप्त पापी, गोल कटि, घुटने चौड़े, विशाल नेत्र, चौड़ी

छाती, हाथ पैर में पद्म रेखा, गोल जांघ, पिंगल वर्ण, मत्स्य, पक्षी या वज्र से शरीर

में कहीं चिल्ल हो । यदि शीर्षोदय राशि, दिवाबली, स्थिर, सोम्य, स्त्री, उत्तर दिशा में

बली, दक्षिण दिशा की ओर मुह ।

९-धनलग्न--नीतिज्ञ, ss, कुल में प्रधान, विद्वान्‌, मनुष्यों का पोषक, राजा

का कृपा पात्र, प्रगल्भ (बातूनी), त्यागी, शत्रु, पीडक, बली, चतुर, कलाओं का ज्ञाता,

घनुर्वेद का ज्ञाता, हिज देव भवत, दयाळु, तालाब आदि बनाने वाला, बुद्धिमान्‌, यशस्वी,

वाहन युक्त, सत्पप्रतिज्ञ, गविष्ट, मधुर भाषी, बन्धुओं का द्वेषी, बाप का घन बहुत

हो। लम्बा चेहरा, गर्दन, कान नाक दाँत ओंठ मोटे, बुरे नख, बहुत मोटा, कई दिन

में कुबड़ा हो, राशि पृष्ठोदय, रात्रि बली, द्विस्वभाव, पुरुष, क्रूर, चंद्र, पूर्व में बली, ईशान की ओर मुख ।

१०-मकर छग्न-नीच कर्म, बहुत संतान, लोमी, आलसी, सर्वंनाशी, उद्यमी

भाग्यवान्‌, सदा अपने पैर पर खड़ा, सर्व घमं के कायं में प्रेम, कठोर, शठ, अपने का

काम करने वाला, अच्छे आचरण, सन्तोषी, भयभीत दूसरों को ठगने वाला, पराया घन

हरने वाळा, परस्त्री से. प्रेम, दीन वचन, काव्य जाने, विद्वान्‌, निदेय, निर्लज्ज, ठंड से

डरे, कृश, निम्न अंग दुबंछ (कमर के दुबंछ), वात कफ पीड़ित, बड़ा शरीर, उत्तम नेत्र,

यह पुष्टोदय राशि है, रात्रि बली; सोम्य, स्त्रो, चर, दक्षिण में बली, पश्चिम में मुह ।

५ ११-कुंभ--परस्त्रीगामी, धीरे काम करने वाला, अनन्त सुख चाहने बाला, गुप्त

रूप से पाप कमं करे, पर कायं में बाघक, चलने में सहनशील, अल्पघन, लोभी, पर

घन का स्वतंत्रता पूवंक उपभोगी, हानि-छाभ युक्त) गंध ओर पुष्प का प्रेमी, चंचल,