भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 270, कुल 418 में से

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२५४ : ज्योतिष-शिक्षा, तुतोय फलित खण्ड

बहुमोजी, चंचल) नेत्र, कंठ में रोग, गौर अंग, शरोर लम्बा, तामे के रंग के समान

नेत्र, सुन्दर शरीर ।

४-कर्क राशि--परोपकारी, पृभ्रवान्‌, गुणवान्‌, सावु, माता पिता का भकत,

अल्पायु, घनहीन, युवावस्था में सुखी, वृद्धावस्था में धमं में रुचि, तोर्थ यात्रा करे, सिर

में रोग, बहुत बंधु, बहुत स्त्री, बहुत मित्र, प्यारी वाणी, शूरवीर, गुरु भक्त, धर्मात्मा,

परदेशवासी, क्रोषांध, बलहीन, स्त्री के वश रहे, ज्योतिष शास्त्र में प्रेम, कभी घनवान्‌,

कभी निर्धन, जलाशय बगीचे आदि में प्रेम, कामासक्त, भ्रमणशील, दुर्वेल देह, कुटिल,

शीघ्र चलने वाला, मोटी गर्दन ।

५-सिंह राणि-घनघान्य युक्त, लक्ष्मीवान्‌, संग्राम प्रिय, विद्वान्‌, सब कला जाने,

परदेश में भ्रमण का इच्छुक, क्रोधी, अल्प पुत्र, सब जगह, रहने वाला, शत्रुनाशक, सिर

में रोग, कठोर, श्रेष्ठशील, कृपण, सत्यवादी, क्षमावान्‌, सदा मद्य मांस का प्रेमी, शीत

से भय, सच्चे मित्र वाला, विनयी, शीधक्रोधो, माता पिता का भवत, विख्यात, व्यसनी,

लज्जावान्‌, स्त्रियों के साथ द्वेषी, मानसी पीड़ा, दाता, परात्रमी, घीर बुद्धि, अभिमानी,

सुखी, सुन्दर मुख, गंभीर दृष्टि, मोटी दाढ़ी; बड़ा मुख, पीछे नेत्र, दंत रोगी, क्षुधा

तृषा से युक्त । `

६-कत्या राशि--धनवान्‌, बहुत नौकर, परदेश जाने वाळा, सदा थानन्द करने

चाला, देव ब्राह्मण भवत, बहुत पुत्र, अल्प कन्या संतान, विलासी, घर्मात्मा, दाता,

चतुर, कवि, लोकप्रिय, नृत्य गान का व्यसनी, स्त्री निमित्त दुःखी, सज्जनों को आतुर ५

दायक, वेद मार्ग में परायण, आळसी, मधु रवाणी, सत्यवादी, पराये घर या धर्नःसे ह

युक्त, विषयों में आतुर, अधिक विद्या, लिंग और कठ में चिह्न ।

७-तुलाराशि --माननीय, भोगी, घर्मो, बहुत नौकर, चतुर, कुंआ तालाब आदि

बनवाने वाळा, कलाओं का जाता, राजाओं का प्यारा, मीठे अन्न और रसों में प्रीति,

पिता का भक्त, स्त्रीयुक्त, अल्प संतान, थोड़े भाई, कृषि कम में चतुर, क्रय-विक्रय से

घन पैदा करे, देव ब्राह्मण पूजक, स्त्री के वचन में चलने वाला, असमय क्रोध, दयालु,

पराक्रमी, व्यापार में कुशल, स्वजन प्रिय, बुद्धिमान्‌, अति क्रोधी, घनवान, अंगहीन

योगी बंधु, एक जम्म का नाम पीछे दूधरा देव संज्ञक नाम विख्यात हो, कुटुस्ब का

हितकारी, दु.खयुक्त, कोमल वचन, ऊँचा शरीर, नाक पतली, शिथिल गान । ८_ृश्चिक राशि--शत्रु से संतप्त, कलह प्रिय, शत्रुता करने वाला, विश्वासघाती, द्रोह करने में चतुर, संतोषहोन, पराये कार्य में बिघ्न करे, राज पुज्य, २ स्त्री, ४ भाई,

बालपन से ही परदेश वासी, क्रूर हृदय, शूरवोर, पर स्त्री गामी, स्वजनों में निष्ठुरता युक्त, साहस से लक्ष्मी पावे, माता में दुष्ट बुद्धि रखे, चोर, घुर्त, माता-पिता व गुर से रहित, बाल्यावस्था में रोगो, गुप्त पापी, पिंगळ नेत्र, पर स्त्री रत, नेत्र; छाती बड़े, जाँच व जानु गोल पात शरीर, विषम स्वभाव, मछली वज्र या पक्षी का चिल्ल हाथ पैर में । लोभी, रोगी, भ्रमणशील ।

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