भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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युग संवत्सरादि फलाध्याय : २५५

९-घन राशि--चतुर, धर्मवान्‌, राज्यमान्य, श्रेष्ठ पुत्र, देव ब्राह्मण भक्त, लोकप्रिय प्रगल्भ, सभा में बोलने वाला, भाग्यवान्‌, दृढ़ मित्र, साहसी, नम्र, सहनशील, शांत स्वभाव, सात्विक प्रकृति, शिल्प विद्या का ज्ञाता, घन सम्पन्न, पानो, दिव्य स्त्री, चरित्र" वान्‌, तेजस्वी, कुलनाशक, पितृ धन युक्त, दानी, कविता करने वाला, बोलने में चतुर, वंधु बैरी, सुंदर नख, मोटे दाँत, ओंठ और गर्दन, पैर के तलुए कोमल, गर्दन छोटी, कुवड़ा, हाथ पैर मोटे । यह प्रीति से पक्ष होने वाला, श्रेष्ठ कुछ, रुचिर दृष्टि 1 १०-मकर राशि--घीर, चतुर, क्लेश युक्त, राजा का प्यारा, पुत्रवंत, दयावान्‌, सत्यवान्‌, भाग्यवान्‌, आलसी, स्त्रियों के वश रहे, कुछ में सबपे हीन, बुराई करने वाला, गान विद्या का प्रेमी, माता का प्यारा, धन, दानी, दयावान्‌, अच्छे नौकर, बहुत भाई, दंभी, मिथ्या घमं करने वाला, आलसी, शीत न सहन कर सके, विद्वान्‌, लोभी, निर्लज्ज, पर स्त्रीगामी, बड़ा मस्तक, अगम्या या वृद्धा से गमन करने वाला,

कमर के नीचे पतला, सुहावने नेत्र ।

११-कुम्भ राशि--दानी, मिष्ठान्न भोजी, प्रिय वचन, क्षीण शरीर, अल्प संतान,

३ स्त्रियों वाला, कामी, घन हीन, आलमी, कृतज्ञ, सदा सुखी, धन भोगी, सामथ्यंवान्‌,

वाहन युक्त, विद्या में उद्यमी, पाप कर्म में तत्पर, पण्डितों का बैरी, अधिक विद्या,

शीळवंत, घर्म कायं को जल्दी करे, बाँये हाथ में चिल्ल, मंडूक के समान कुरव वाला, निर्भय, ऊँट के समान गर्दन, सर्वाज्ध में प्रगट नसें, रूखे और बहुत रोम, ऊँचा शरीर, कुल्हे जाँघ पीठ घुटना मुख कमर पेट ये सब मोटे, पुष्प चन्दन और मित्रों के प्रिय,

पर स्त्री, पर घन और पाप कर्म में तत्पर ।

१२. मोन राशि--घनवान्‌ मानी, नम्न, भोगी, प्रसन्न चित्त, माता-पिता देव

पूजक, गुरुभक्त, उदार, रूपवान्‌, गंध और पृष्प माला का प्रेमी, शूरवीर, बोलने में

चतुर, क्रोधी, कृपण, जानवान्‌, गुणवान्‌ शीघ्रग्रामी, गान विद्या में कुशल, शुभाचरण,

भाई बन्धु ने स्नेह, जल रत्न मोती आदि के क्रय-विक्रय रो उत्पन्न घन, पराये पाये घन

का भोगी, शत्रुजित्‌, अकस्मात्‌ गड़ा या भूमि गत द्रव्य भोगने वाला, विद्वान्‌, बहुत

स्त्रियों का स्वामी, सब बवयवों से परिपूर्ण, सुन्दर शरीर, ऊँची नाक, बड़ा सिर, सुहावने नेत्र, कांतिमान्‌ ।

नवांश जन्म फल

( १ ) पहिले नवांश में जन्म--नन्न, घर्म शील, सत्यवक्ता, दृढ़ प्रतिज्ञ, विद्या का

प्रेमी, ( वृहज्जातक और जातका भरण )

अन्यमत--चुगुल, चंचल, दुष्ट, पापी, चोर, कुरूप, अन्य को दुःखदाई

( मान-सा० और लग्नच स्ट्रिका )

( २) द्वितीय नवांश--उत्पन्त वेभव का भोगी, युद्ध में हार, वेश्या में आसक्त

या गाने वाले की स्त्री में आसक्त, युद्ध में अनिच्छा ।

( ३ ) तृतीय नवांश--स्त्रियों से जीता हुआ, पुत्रहीन, इन्द्रजाळ करने वाला,