भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२६० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

(३) मिथुन राशि--६ मास, ६ वर्ष में कष्ट, अंग रोग, १० में नेत्र पीडा, १२८

१८ š घात, २४, ५३, ६३ में अल्प मृत्यु । उस राशि पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो ८५

वर्ष की आयु हो पोष मास अष्टमी, बुधवार, आर्द्रा नक्षत्र, प्रथम प्रहर में मृत्यु हो

(मान सा०) पांचवें में वृक्ष भय, १६ में शत्रु मय, १८ में मृत्यु तुल्य पीड़ा, ८० वर्ष

की आयु हो । वैशाख शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि वुधवार, के मध्याह्न समय हस्त नक्षत्र में

मृत्यु हो । (जा० भ०)

(४) कर्क राशि--११ दिन में कष्ट, ९ मास में कष्ट, १ वर्ष में रोग, ७-में जल

चात, ९ में अंग रोग, १२ में जल घात, १६ में अंग रोग, २० वषं में लोह घात, २७

और ३५ में अल्प मृत्यु, ४५ में देव दोष, ५५ ओर ६१ में अल्प मृत्यु, राज कष्ट, असाध्य

रोग, सर्प घात, जल घात, साँड़ से और व्याघ्र से मय इस राशि पर शुमग्रह की दृष्टि

हो तो ७० वषं ५ मास ६ दिन में.फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष के चतुर्थ प्रहर में गोधूलि के

समय मृत्यु हो (मान० सा०) पहिले में रोग हो, ३० में लिंग पोड़ा, ३१ में सर्प से भय,

३२ में बहुत पीड़ा, ८५ या ९६ वर्ष को आयु माघ मास शुक्ल ९ तिथि शुक्रवार रोहणो

नक्षत्र मे मृत्यु हो (जा० भ०)

(५) पिह राशि--८ मास या १ वर्ष में कष्ट, १० वर्ष, १५ वर्ष में अंग रोग,

२५, ४५ वर्ष में देव दोष, सन्निपात, ५१, ६१ वर्ष में घात । अस्प मृत्यु से बचे तो

६५ वषं जोवे, श्रावण शुदी १० रविवार पूर्वाफाल्गुनो नक्षत्र एक प्रहर में मृत्यु हो

` (मान सा०) पहिले वर्ष में मूत बाघा, पाँचवें वर्ष में अग्नि भय, ७ वें वर्ष में ज्वर,

या विणूचिका रोग हो । २८ वषं में झगड़ा, ३२ वर्ष में बड़ी पीड़ा, पेट के दाहिने तरफ

वात रोग गुल्म रोग हो । जो चन्द्र को शुभग्रह देखता हो तो १०० वर्ष को आयु हो

फाल्गुल शुक्ल पक्ष मे, पंचमी, मंगलवार को भध्याह्ल समय जल के बोच मृत्यु हो

(जा० qo)!

(६) कन्या राशि--३ मास ३ वर्ष में अंग रोग, १ वषं १३ वर्ष में नेत्ररोग और

जल घात, २६ वर्ष में अंग रोग, देवकोप स पीड़ा, ३३ वर्ष में लोह घात, ४३ वर्ष में

अंग रोग । चन्द्र पर शुभग्रह को दृष्टि हो तो ८४ वर्ष जीकर भाद्र शुक्र ९ रविवार हस्त￾नक्षत्र में गोधुली के समय देह त्यागे (मान सा०) तोसरे वर्ष अग्नि को पोड़ा, पांचवे

वर्ष नेत्र रोग, नवम वर्ष, १३ वर्ष में बाधा, १५ वर्ष में सर्प भय, २१ वर्ष में वृक्ष से गिरे

या भीत से गिरे । ३० वर्ष में जंगछ में हथियार का घात, ८० वर्ष को आयु हो बदि

चंद्र पर शुभग्रह को दृष्टि हा तो चैत्र कृष्ण १३ रविवार को मृत्यु हो ( जा० भ० )।

(७) तुला राशि--४ मात मॅ कष्ट, १६ मास में अंग रोग, ४ वर्ष में कष्ट, १६

वर्ष में जल घात, २१, २३ वर्ष में अंग रोग, ४१ वर्ष में अंग वृद्धि, ५१ वर्ष में देव

दोष, ६१ वर्षमें अल्प मृत्यु, चन्द्र पर गुमप्रह को दृष्टि हों तो ८५ वर्ष जीवें,

वैशाख शुक्ल १३ शुक्रवार चित्रा नक्षत्र मध्याह्न के समय मृत्यु हो ( मान० सा० ) ।

७ वर्ष में अग्नि भय, ८ वर्ष में ज्वर, १२ वर्ष में जल से भय, वृक्ष से या घोड़े से गिरने

  • का। २० वर्ष सें सपं का सय । २१ वर्ष में पीड़ा । चन्द्र पर शुभ दृष्टि हो तो ८५ वर्ष