सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 284, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें२६८ : ज्यातिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
(११) चिल्ल करने वाला पाप ग्रह बली हो तो. व्रण फोड़ा भगंदर मूलक व्याधि मेह
` आदि रोगहों।
(१२) यदि ३-४ पाप ग्रह वहाँ हों और वहाँ बुघ भी हो तो भी व्रण भगंदर प्रमेह
चुषण[वृद्धि, पाँद को सूजन कोढ आदि हो यदि वहाँ बुध न हो तो इनके चिल्ल न होंगे ।
ये ग्रह जहाँ हों उनके द्रेष्काण के अंगों मै प्रभाव करेंगे । ;
इतर चिह्न होने के योग व उनका स्थान
१--छग्न से सप्तम में राहु, लर्न में गुरु, अष्टम में पाप ग्रह या शुक्र हो तो बाँयीं
भुणा में चिल्ल करते हैं ।
२ सप्तम या लग्न में गुरु हो तो वाई भुजा में तिल मसक आदि चिल्ल करते हैं ।
३--नवम भाव में चंद्र ओर तीसरे में शनि हो या तीसरे भाव में राहु शुभ युक्त या
दुष्ट हो तो भुजा या कुक्षि में चिह्व हो ।
` डॅ--तोसरे भाव में मंगल पाप ग्रह से दृष्ट हो तो भुजा में घाव का चिह्न हो या
गले में पित्त से रोग हो ।
१-३, ६ या ११ घर में मंगल, १२ घर में शुक्र के साथ मंगल हो तो वायें बगल
में घाव का चिह्न हो । S— में शुक्र अष्टम में बुघ गुरु, चतुर्थ में शनि हो तो कुक्षि में चिल्ल ।
७--पंचम या नवम स्थान में शुक्र, अष्टम में बुघ गुरु, चतुर्थं या लगन में शनि हो तो[कुक्षि या पेट में चिह्न हो ।
८ द्वितीय में शुक्र, अष्टम या लग्न में सूर्य ओर मंगल शनि तीसरे में हो तो कटि
में चिह्न हो ।
९--राहुया शनि छठे घर में हो तो कटि में काला चिह्न हो । १०-बारहवे गुरु, ३, ६ ११ घर में बुघ, ३ आव में शुक्र हो तो हृदय में चिह्न । ११- चतुर्थ भाव पाप युक्त हो तो कंधा, कुक्षि या हृदय में तीखी चोट लगने का चिह्न हो ।
१२- छन में मंगल ओर शुक्र से दुष्ट शनि त्रिकोण में हो तो लिंग या गुदा के समीप तिल हो ।
१३--छर्न में मंगल व बुध और ६, ५, ९ घर में राहु हो तो छि या गुदा में rosae आदि चिह्न हो ।
४ शुक्र रै भाव में, गुरु ३, ६, ११ घर में, चंद्र नवम हो तो गुदा में गोलक चिह्न हो ।
(em से १२ वें घर में गुह, नवम में चंद्र, ३, ६, ११ घर में बुध हो तो गुदा म घाव का चिह्न हो ।
१६ नवम भाव में शुर अष्टम में सूर्य, दशम में राहु हो तो नाभि में चिह्न हो ।