भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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कालांग विचार : २६९.

. १७--चतुथ में राहु और शुक्र, रून में शनि या मंगल हो तो पाद मूल या बाँये

पाद में चिह्न हो ।

१८--छूग्न से सप्तम में मंगल गुरु व शुक्र हो तो मस्तक में चिह्न ह! ।

१९--छगन में मंगळ शुक्र व चंद्र हो तो १२ वर्ष में मस्तक में चिह्न हो ।

२०--द्वितीय भाव में सूयं हो तो मुख पर शिला सम्बन्धी या व्याधि का

चिह्न atl

२१--जन्म लग्न में शुक्र और अष्टम में राहु हो तो मस्तक या बाँये कर्ण में

चिह्न हो । `

२२---लग्न में मंगल और सप्तम में गुरु या शुक्र हो तो सिर में घाव चिह्न हो ।

२३--लरन में मंगल शुक्र और चंद्र हो तो उसके सिर में दूसरे या छठे वर्ष किसी

प्रकार का चिह्न हो । :

२४--लग्नेश और मंगल लग्न में बुरे ग्रह से युक्त या दृष्ट हो तो सिर में जख्म,

या फोडा, पत्थर के काटने से या तलवार छगने से होगा ।

२५--यदि मंगल के बदले शनि लग्नेश के साथ बुरे ग्रह से युक्त या दृष्ट हो तो

सिर में चोट, गिरने से या चट्टान, अग्नि या दूसरे चीजों से चोट हो।

२६--मंग वरा ग्रह है दुसरे बुरे ग्रह शनि सुर्यं अशक्त चन्द्र, पाप युक्त बुध, राहु

केतु Š इनमें से कोई ग्रह या सब लग्न में हों तो शिर के चिल्ल बड़े भारी होंगे । बड़ा

कटने का चिल्ल या कुरूपता छाने वाला चिह्न होगा । यदि ये पाप ग्रह यथार्थ में बुरे हैं ।

और लग्नेश अशक्त हो तो वे चोट के चिह्न बड़े भारो कुरूपता लाने वाले अवष्य होंगे ।

यदि लग्नेश अच्छे साथी युक्त हो उच्च या गुम युक्त या गुम दृष्ट हो तो ये चोट अल्प

लगेंगी और सिर में नाम मात्र का चिह्न होगा ।

२७--छू्त द्रेष्काण के विभाग में लग्न में राहु मंगळ या शनि सिर स्थान में हो तो

अग्नि, शस्त्र या काष्ट से भय हो ।

इस प्रकार ग्रहों के बलाबल से अच्छे या बुरे प्रभाव की घटाबढी विचार कर

अपनी वुद्धि ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव से फल के घट बढ़ आदि का विचार करना ।

कारांग का और भी उपयोग :

faran जन्म में सूर्य मेष का उच्च काहै। मेष का स्थान सिर है । उच्च

का होने से प्रगट करता है उच्च मस्तिष्क वाला होगा । मस्तिष्क क बळ रुपया पैदा

  • करेगा । यह उच्च पदाविकारी मंत्रो आदि हो सकता है या मेप का सूय ऊन में हों तो

सिर में चोंट आदि का भग्र उत्पन्न करेगा 1

तिळ और sgr होने का फल f

खनो पुरुष के देह स्थित भंवर तिल मशक आदि होने का फल स्त्रियों के बाग भाग

में शुभ और पुरुषों के दक्षिण माग में तिळ मशक या रोमावर्त शुभ होता है ।

स्त्री के हृदय में तिल सौभागयवती 1