सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 286, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ें२७० : ज्यौतिष-शक्षा, qara फलित खण्ड
स्त्री के दक्षिण स्तन पर रक्त वर्ण तिल आदि qaq चिह्न हो तो सुख सौभाग्य युक्त हो बहुत संतति हो । अधिक कन्या और पुत्र हों ।
वाम स्तन पर रक्तचिल्व--केवल १ पुत्र हो ।
ओंठ के मध्य या ललाट पर रक्त वणं तिल आदि चिल्व---राज्यप्रद ।
गाल पर--नित्य मिष्ठान्न भोजन दायक ।
गुह्य स्थान के दक्षिण भाग में--राजपत्नी या राज माता होती है ।
जिसके नाक पर लाल चिह्न हो--राजपत्नी ।
कृष्ण वर्ण दाग--व्यमिचारिणी या विघवा हो।
नाभि के नीचे पुरुष या स्त्री के सब चिक्त शुभ होते हैं । कान, गाळ, हाथ, तथा कंठ पर तिल आदि--सुख सोभाग्य युक्त, प्रथम पुत्र संतान ।
जांघ में तिलादि चिह्ल--दुःखो रहे ।
स्त्री के कपाल में त्रिशूळ सदुश चिह्न--रानो हो ।
पुरुष के कपाल में त्रिशूल सदृश चिह्न--राजा हो ।
हृदय, जीम, हाथ, कान, पृष्ठ के दाहिने भाग और वस्ति में रोमावलो हो तो दक्षिणावतं शुभ, वामावतं अशुभ है ।
कमर गोप्य स्थान में रोमावलो-शुभ नहीं ।
पेट में हो तो--विघवा हो 1 पोठ के मध्य भाग में--व्यभिचारिणो हो । =
कंठ ललाट माँग या मस्तक के मध्य (चोट) में आव्त--शुम । ` उक्त सुलक्षण वाली स्त्री अल्पायु पति को भी सुखी और दीर्घायु बना देती है । ग्रह किस प्रकार व्रण आदि चिह्न करते हैं
( १ ) सूय-यह ब्रणकारी हो या द्रेष्काण पर रवि की दृष्टि हो तो काष्ठ के द्वारा चोट या चौपाये जानवर के द्वारा चोट हो ।
( २) चन्द्र--क्षीण चन्द्र त्रण कारक हो या उस द्रेष्काण पर चन्द्र की दृष्टि हो तो 'सौंग मारने या किसी जलजन्तु के आघात से या किसो जल पदाथं द्वारा या किसी तरल पदार्थ तेजाब आदि द्वारा ।
( ३ ) मंगळ--यह व्रण कारक हो या उक द्रेष्काण पर मंगल की दृष्टि हो तो अग्नि, विष (सर्पा।द) या अस्त्र (हथियार) द्वारा घाव । ( ४) बुघ- यह त्रणकारी हो या उस द्रेष्काण पर बुघ को 'गिरने से या पत्थर आदि के चोट से घाव । Rennie
(५) गुरु शुक्र, गुरु, पूर्ण चन्द्र, शुभ बुष ( जो पाप ग्रह के साथ न हो ) जिसके द्रेष्काण में हो या उसे देखते हों उस द्रेष्काण के अंग में कोई चिह्न नहीं होगः। बह .. अंग पृष्ट होगा ।