भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

पृष्ठ 293, कुल 418 में से

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कालांग विचार : २७७

च सन समझने और अध्ययन करने वाला, ईश्वर घर्म और तत्त्वज्ञान. में प्रेम और विश्वास,

थाप और अघमं से डरे, प्रसन्न चित्त रहे, अच्छा नाम ओर कीति प्राप्त करे, घनवान्‌

शौर प्रिय हो, कोई कार्य सरलता पूर्वक कर सके, दूमरे की स्त्रियों का इच्छुक और

प्रेमी, बड़े लोगों से मित्रता, प्रभावशाली और मिलनसार, बड़े लोगों में मित्रता, कभी-

कभी सिर दर्द, उदर पीड़ा, अजीर्ण आदि अन्य प्रकार के उदर रोग से पीड़ा आदि।

(१२) मीन--शरीर साधारण ठिंगना, मोटा एवं मांसल शरीर, हाथ पांव कम

लंबे । शरीर प्रकृति से अशक्त व रोगी, सरल्मार्गी, अच्छे स्वभाव वाला, आसो,

अस्थिर, चंचल चित्त, घामिक, ममतालु, घामिक संस्था औषधालय आदि से राभ,

संगीत प्रेमी, लेखन कला से लाभ हो, सदा आनन्द का इच्छुक, अधिक से अधिक आनन्द,

शांति और सरल जीवन प्राप्ति का घ्यान रहे । इससे पैसे की परवाह न कर बहुत पैसा

खर्च करे 1 कविता और लेखन में बुद्धि और इसमें आनन्द, सदा काम में लगा रहे व्ययं

समय न जाने दे, कभी भो अपने काम में फिजूळ खर्च न करे । विश्वसनीय, आँख बंद

कर विशवास कर लेवे, बचपन और आरम्भ आयु में बहुत खतरे से बचे, शत्रु से या

ser बाजी में धन की हानि, कभी-कभी डरपोक कभी अवसर पर साहसी, अनिश्चित

अनन की दशा में कभी अच्छा अवसर हाथ से निकल जाने दे, संगीत नृत्य, नॉटक, ललित

वला में रुचि और आनन्द, उसके प्रसिद्ध मित्र रहें ।

लग्न से विशेष विचार--छग्न में जब कोई ग्रह न हो तब इन राशियों का प्रमाय

प्रगट होता है । यदि लग्न में कोई ग्रह हों या लग्न फे अंश पर बलवान्‌ qg का दृष्टि

योग हो तो अपने घमं के प्रमाण से यहाँ वर्णित लग्न के स्वरूप स्वभाव में अन्तर पड़

जायगा ।

जब लग्न में कोई ग्रह न हो उस समय चन्द्र या जन्म लग्नेश जिस राशि पर हो

इन दोनों में जो बली हो गा केन्द्री हो उस राशि के गुण घर्म व स्वरूप के प्रमाण से

विचार कर लग्न से प्राप्त होने वाले स्वरूप व स्वभाव में अन्तर जान लेना । जब एक

राशि में चार या अविक ग्रह हों उस समय उस राशि के गुण घम उस मनुष्य के शरीर

में स्पष्ट दिखाई देंगे । हि काल पुरुष के अंग के अनुसार इन राशियों का कुण्डली से विचारने का उदाहरण

जन्म में जिस राशि का लग्न हो उस जज

छर्न से १२ भाव में जो राशियाँ हैं

उनमें से कही पापग्रह हों तो राशि के

अनुसार जो कालपुरुष का अंग हो उस

अंग मे उस ग्रह की दशा में दुःख

होगा ।

यदि शुभग्रह को दृष्टि उस पापग्रह :

वर हो तो उस शुभग्रह को दक्षा में वह दुःख अच्छा हो जायगा t

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