भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२७८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

यदि वह भाव शुभ ओर पापग्रह दोनों से युक्त हो तो यदि शुभ बलवान्‌ होगा तो दुःख

नहीं होने देगा ।

यदि यहाँ केवल शुभग्रह हो तो उस अंग में व्याधि न होगी अपितु वह अंग पुष्ट

होने को संभावना है 1

१--यहाँ कुंडली में मिथुन लग्न है वह जातक का मुख है वहाँ कोई पापग्रह नहीं

है तो मुख पर कोई चिह्व न होगा । लग्न में गुरु है इससे कपाल और सिर सुन्दर देखने

योग्य होगा ।

२--सरे स्थान में कर्क राशि है वह मुख हुआ मुख स्वच्छ होगा क्‍योंकि वहाँ कोई

ग्रह नहीं है ।

३--तृतीय में सिंह है तृतीय छाती का स्थान है वहाँ कोई ग्रह न होने से वह स्व￾स्य होगा ।

४-चतुर्थस्यान हृदय का है कन्या राशि है कोई ग्रह नहीं है तो हृदय स्वच्छ होगा t

५--पञ्जस स्थान पेट का है जिसमें तुला राशि है इसमें ५ ग्रह हैं जिसमें ३ पाप०

ग्रह हैं इनमें शनि मंगल अस्तंगत हैं । अस्तंगत होने के कारण थे प्रभावहीन हो गये परन्तु

उनकी दशा में पेट में पोड़ा होगो 1 गर्मी का उपद्रव करेगा । इसमें सूर्य भा है जो नीच

का है इससे वह २ वर्ष को आयु तक व्याधि ग्रस्त रहेगा । परन्तु उस स्थान में शुभ

ग्रह भी हूँ वे उस व्याधि को ठोक कर देंगें ओर पेट के भाग में दाग का चिह्न नहीं के

बराबर होगा ।

६--छठा स्थान कटि का ë जिसमें पापग्रह केतु है यह वृश्चिक राशि में है । जिस

समय गोचर में वृषचिक राशिका mg आयेगा तो खाज आदि चर्म रोग उत्पन्न करेगा ॥

परन्तु उस स्थान में चन्द्र भी है वह अपनी दशा में रोग अच्छा कर देगा 1

७--सप्तम स्थान नाभि के नीचे का है--कोई ग्रह न होने से वह निरोग होगा t

८---अष्टम स्थान गुप्तांग का हे कोई ग्रह वहाँ न होने से निरोग होगा 1

९--नवम स्थान दोनों जाँघ और वृषण का है यह स्थान शनि का (कुम्भ राशि) है। शनि उच्च का है और शनि से त्रिकोण पंचम स्थान में है शनि पापग्रह है इससे षह अपनो दशा में दाहिनी ओर वृषण की वृद्धि करेगा परन्तु वह हानिकारकः नहीं होगी ।

१०--दशम भाव घुटने का है इसमें ग्रह न होने से निरोग होंगे ।

११--एकादश भाव--दोनों पिंडली हैं कोई ग्रह नहीं । परन्तु यहाँ मेष रागि है जिसका स्वामी मंगळ उसे देखता है इससे वहाँ कष्ट देगा क्योंकि मंगळ पापग्रह है । १२-वारहवां स्थान पंजों का है जिसमें राहु पापग्रह है इससे वहाँ कोई दाग या चिल्ल करेगा ।

शरोर का रंग गोरा-काला आदि जानना (१) जन्म लर्न से चन्द्र किसी मो राशि में हो परन्तु वह चन्द्र जिस राशि के

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