भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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कालांग विचार : २७९

नवांश में हो उत्त सरीखा रंग होगा 1 कई चन्द्र के होरा से मी विचार करते हैं। चन्द्र

का होरा गौर वर्ण देता है सूर्य का श्याम वर्ण ।

चन्द्र के नवांश के अनुसार इस प्रकार वर्ण होता हेन

सूयं--श्याम वणे, चन्द्र--गौर वरणे, मंगल--रक्त गौर (ललाई लिए गौर वर्ण),

बुध--श्याम वणं, गुरु--तप्त कंचन वण, शुक्र--श्याम वर्ण कितु चित्ताकर्षक, शनि

काला ।

(२) लग्न में जो बलवान्‌ ग्रह हो उस सरीखा वर्ण ।

सूर्य--ताम्र वणे, चन्द्र--गौर वर्ण, मंगल रक्त गोर, बुघ--स्वच्छ एयाम वर्ण

अर्थात्‌ काला नहीं, गुरु--चित्ताकर्षक कंचन वर्ण, शुक्र--रंग गोरा न हो पर चित्ताकर्षक

हो, शनि--काला वणं ।

(३) चन्द्र के नवांश पति ओर छन्न स्पष्ट के समीप कोई ग्रह हो तो दोनों के

भिश्चित रंग के अनुसार होगा । जैसे चन्द्र नवांदा में गुरु और लग्न में सूयं हो तो तप्त

कंचन और ताम्र वर्ण मिश्रित होगा ।

(४) लग्न में कोई ग्रह न हो तो राशि के नवांश स्वामी के सरोखा रंग होगा ।

(५) इसी प्रकार लग्नेश, छान नवांश, चन्द्र, नवांश, ओर लग्न गत TG के मिश्रण

का विचार कर रंग का विचार करना । इन सब में जो बलवान्‌ ग्रह हो उसका ध्यान

रखना । जैसे ग्रह बली हो तो ग्रह नवांश तुल्य, राशि बली हो तो राशि नवांश तुल्य रंग

होगा ।

शरीर का गठन विचार

१--शरीर ५ तत्त्व से बना है और जल का अंश कितना है जानने को कह ग्रह

सजल है या निर्जल नीचे दिया है ।

ग्रह सूर्यं चन्द्र मंगल बुध गुरुं ` शुक्र शनि

तत्त्व अग्नि जल अग्नि ` पृथ्वी . आकाश (तेज) जळ. वायु

जल शुष्क जल शुष्क जल जल जल शुष्क

इसके अनुसार जातक के शरीर का गठन आदि का अनुमान होता है ।

२--केवल ग्रह का हो नहीं, राशि का भो प्रभाव शरीर के गठन पर होता है इस￾छिपे राशियों का तत्त्व और जल का विचार नीचे दिया है । š

राशि मेष वृष मिं कर्क सिंह कन्या तुला वृक्चिक धन मकर कुंभ मीन

तत्व अग्नि पृथ्वो वायु जल अग्नि पृथ्वी वायु जल sf पृथ्वी वायु जळ

जल जल जल निल जळ Fri निजंछ जल जल जल जल जल जल

कितना पूर्ण पूर्ण पूर्ण

क वल WEA MYC DR arden br Q

३--(क) ४-८-१२ राशियाँ जल तत्त्व की हैं परन्तु पूर्ण अदे भाव आवि जलके