भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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भिन्न-भिन्न राशि में ग्रहों का फल : २८७

निपुण, शास्त्राथं ज्ञाता, घर्मात्मा, बुद्धिमान्‌, संभोग में चंचळ, पराया घर व धन से युक्त, परदेश वासी, अल्प पुत्र अधिक कन्या (qo जा०) । (७) चन्द्र तुला का--बैलों या घोड़ों आदि फे बेचने खरीदने से जीविका चलावे पराक्रमी, देव ब्राह्मण पूजक, दानी, बहुत स्त्रियां, पराक्रम से वैभव और प्रतिष्ठा मानने वाळा, (मान सा०) (जा० भ०) । देव ब्राह्मण साधु का पूजक, बुद्धिमान्‌, पर घन आदि में निर्लोमी, स्त्री फे वशीभूत, घनवान्‌, फिरने वाला, अंगहोन, क्रय-विक्रय व्यापार जानने याला, रोगी, कुटुम्ब का हितकारी, बन्धु जनों से त्यक्त (वृ० जा०) ।

(८) वृश्चिक का चन्द्र--राजा से या जुआ से घन का नाश, कर भ्रिय, साहस

होन, दुष्ट मन, खोटे ख्याल वाला, शांति रहित, अन्त में रोगी (मान०) (जा० भ०) । माता-पिता गुरु से रहित, राज पूज्य, गुप्त पापी, वाल्यावस्था में रोगी, विषम स्वभाव (वृ० जा०) ।

(९) घन का चन्द्र--अनेक कला कुशल, संगीतज्ञ, सरल वाणी, पूर्ण घनी होकर भी कपण, निर्मलता युक्त, (मानसा०) (जा० भ०) । पितृ घन युक्त, दानी, कवि, बल- चान्‌, बोलने में चतुर, उद्यमा, लिपि, चित्र आदि शिल्प कर्म ज्ञाता, अति प्रगल्भ, घमंज्ञ

बन्धु वेरी, केवळ प्रोत के बश में होने वाला (qo जा०) ।

(१०) मकर का चन्द्र--शीत से डरने वाला, गायन विद्या का ज्ञाता, किंचित्‌

क्रोघी, अति कामी, अपने कुळ के अनुकूल उत्तम वृत्ति करनेवाला (मान० सा०) 1 अपनो

स्त्री qi सं प्रेम, दम्भो, मिथ्या घमं करने वाला, सवे प्रिय विद्वान्‌, लोमी, बलवान्‌,

काव्य करने वाला, फिरने वाला, निलंज्ज, निइ'य (qo जा०) ।

(११) कुम्भ का घंद्र--अति आलसो, पराये पुत्र से.प्रोत, अत्यन्त चतुर, वैरियों

का नाशक (मान सा०) । पर स्त्री पर घन आर पाप कमं में तत्पर, मित्रों का प्रिय,

वृद्धि क्षय से युक्त, पुष्प चन्दन प्रिय (qo जा०) ।

(१२) मीन का चन्द्र- जितेद्धिय, गुणवान्‌, अतिनिपुण, निमंल बुद्धि, शस्त्र विद्या

में प्रवीण, चंचल, जल की लालसा वाला (मान०) (जा० qo) । जल रत्न के क्रय￾विक्रय से उत्पन्न घन, पराये कमाये घन का मोगी, स्त्री विषय वस्त्रादि में अनुरक्त,

शत्रु को जीतने वाला, निधि (भूमिगत द्रव्य) आदि का भोगो, शास्त्रज्ञ पंडित

(बु० जा०) 1

३ मंगल का राशि फल

( १ ) मंगल मेष का--राजा से प्राप्त भूमि, मान ओर घन से परिपूर्ण, सुन्दर

वाणी, तेजस्वी, साहसी, निरन्तर, सब मनुष्यों का प्यारा, (मान० सा०) (जा० अ०) ।

स्वगृही १-८ राशि का--राज पूजित, फिरने वाला, सेनापति, व्यापारी, घनवान्‌, चोर,

चंचल इन्द्रिय (विषयी), शरीर में चोट हो (go जा०)। (२) मंगल वृष का--घर ओर घन का थोड़ा सुख, छत्रुओं से युक्त, दुसरे के घर में वास करने वाळा, अत्यन्त पुत्र जनित पोड़ा को प्राप्त, अनीति और अग्नि रोग