भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२८८ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

सहित (जा० भ०) (मान०) । शुक्रपृहो (२-७ राशि फा)-स्त्री के बश में रहने वाला,

मित्रो के विरुद्ध रहने वाला, पर स्त्री गामी, इन्द्र जाली, सुन्दर श्यंगार युक्त, उरने

वाला, स्नेह हीन, (zo जा०) ।

(3 ) मंगल मिथुन का-- बहुत कलाओं का ज्ञाता, स्वघर में परदेश जाने में

य पुत्र आदिको से सौख्य पाने वाला, कुटुम्बी, पुरुषों से कलह करने वाला

(मान सा०) । बुध गृहो (३-६ राशि का)--तेजस्वी पुत्रवान्‌, मित्र

गायन विद्या तथा युद्ध विद्या को जानने वाला, कृपण, निर्भय,

बहुत मन, प्रि

-(जा० wo)

रहित, परोपक्रारी, कृतज्ञ,

मांगने वाला (वृ० जा०) 1

(८) मंगल कर्क फा--पराये घर का वासी, अत्यन्त दीन, बुद्धि हीन, शत्रुओं के

उपद्रव से शक्ति हस के कारण शान्त, स्त्रो से कलह करने वाला (जा० भ०):(मान०

सा०) । नाव, जहाज आदि के काम में धनवान्‌ हो, बुद्धिमान्‌, अंगहीन, तथा दुर्जन

(१० जाश) ।

(५) मंगछ सिंह का--पुत्र और स्तो के सुख की प्राप्ति, शत्रुओं का नाशक, बड़ा

उद्यमी, साहसी, राजनीति, घर्म नीति से कार्य करे, अनीति और नोति सहित, (जा०

o (मान०) । निर्धन, क्लेश सहने वाळा, वन मे फिरने वाळा, अल्प स्त्री पुत्र (a=

जा०)। |

(६) मंगल कन्या का--स्वजन के भरण पोषण में व्याकुल, अधिक : कुटुम्बी,

यज्ञ आदि करने वाला, स्त्री और भूमि के सुख से सुखो । श्रेष्ठ जनों में. पुबनीय (जा०

अ०) (मान०) । मिथुन के मंगल सदुश फल (qo जा०)। S

(७) मंगल तुछा का--आमदनी से खर्च अधिक, किसी अंग से हीन, माता-पिता

आदि बुद्ध जनों से स्नेह रखे, सबको दुःखदाई, विफलता युक्त, मूमि ओर स्त्री के

निमित्त दुःख पाने वाला ( मान० ) ( जा० म० )। वृष के मंगल सदृश फळ

(a° जा०) ।

(८) मंगल वृश्चिक का-- विष अग्नि शस्त्र से भय, संतान ओर स्त्री में सुख, राजा

से स्नेह, शत्रुओं को जय करने वाला, (जा० qo) (मान०) । मेष के मंगल सदृश फळ (बृ० जा०) । ' (९) मंगल घनु का--रथ वाहन आदि गौरव युवत, शत्रु से भय, श्रेष्ठ स्त्री वाला,

स्त्री के साथ भ्रमण, ब्रण रोग से पीड़ित (जा० भ०) (मान०) ।

गुरु क्षेत्री (९-१२ राशि का) शत्रु बहुत हों, राजमन्त्री, विद्वान्‌, निर्भय, थोड़ीसंतान

(वृ० जा०) । |

(१०) मंगल मकर का-ंग्राम में बडा पराक्रमी, स्त्री सुख युक्त, अपने जः

प्रतिकूल, मनुष्यों से भयभीत, अनेक वैभव युक्त, हस्तगत 9 बाला, | ma ) a

म०) । घन और संतति बहुत हो, राजा के तुल्य हो (qo जा०) ।

` \११) मंगल कुम्भ फा--विनय से रहित, रोगी, अपने मनुष्यों के प्रतिकूल, बड़ा