भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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२९२ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

२-शुक्र वृष का--बहुत स्त्री पुत्र, उत्सव तथा गौरव सहित, पुष्प गंघ में रुचि,

खेती का काम करने वाला, शत्रुओं से रहित या अल्प शत्रू, लक्ष्मी से सम्पन्न (यान०)

( जा० भ० ) स्वक्षेत्र ( २-७ रात्रि का )-अपने बल से घन पावे, राज पुज्य, अपने

बंघुजनों में प्रधान, विख्यात, निर्मय, (वृ० जा०) ।

३-शुक्र मिथुन का--सस्पूर्ण शास्त्र व कलाओं में कुशळ, सरल मनोहर वचन,

मिष्ठान्न भोजन का इच्छुक (मान०) (जा० भ०)। राज्य कायं करने वाळा, धनवान्‌,

गीत वाद्य आदि कला जानने वाला (qo जा०) ।

४-शुक्र कके का- श्रेष्ठ कर्मों में बुद्धि, गुण सम्पन्न, सबको कलायुक्त वचनों से वश

में करने वाला, मघुर वाणी ( मान० ) ( जा० भ० ) दो स्त्री हों, माँगने वाला, भय

युक्त, उन्मद; अति दुःखो (qo जा०) ।

५-शुक्र सिंह का--स्त्रियों से घन मान और सुख पाने वाळा, अपने मनुष्यों से दुःख

पाने वाला, मित्रों को संतोष करने वाला, शत्रुओं का नाश करने वाला (जा० wo)

(मान०)। स्त्री का कमाया घन पावे, स्त्री उसकी प्रधान रहे, अल्प संतान, (qo जा०)।

६-शुक्र कन्या का--अति धनवान्‌, तीर्थ करने वाला, अति लक्ष्मीवान्‌, अल्प बोलने

वाला (जा० भ०) (मान०) 1 अति नीच कमं करने वाला (वृ जा०) ।

७ शुक्र तुला का- पुष्प और विचित्र वस्त्रों का प्रेमी, घनयुक्त, देशान्तरों में आने

जाने वाला, उत्तम कवि (जा० भ०) (मान०) । वृष के शुक्र समान फल (वू०जा०) ।

८-शुक्र वृश्चिक का--कलह एवं हत्या करने का इच्छुक, निदा का पाश; विषय

इन्द्रियो में रोग, व्यसन युक्त, कभी कभी घन से युक्त (मान०) (जा० अ०)। मेष में

शुक्र समान फळ (वृ० जा०) ।

९-शुक्र घनु का--पुत्र स्त्रो युक्त, धन का आगमन व उत्सव सहित, राजा का

मंत्री, श्रेष्ठ शील, कवियों में प्रेम रखने वाला, घर में वैराग्य रखने वाला (जा० भ०)

(मान०) । बहुतों का पूज्य घनवान्‌ (qo जा०) ।

१०-शुक्र मकर का--बड़ा कामी, स्त्री में प्रीति, व्यसनी, अधिक खचं, भय सहित,

अत्यन्त चितायुक्त, संगीत प्रेमी, कवि, जंगल में रहने का मन करने वाला (मान०)

(जा० wo) । शनिक्षेत्री (१०-११ राशि का) सब का प्यारा, स्त्रो के वश में रहने

चाला, कुत्सित स्त्री में आसक्त (qo जा०) ।

११-शुक्र कुम्भ का--वस्त्र भूषण आदि भोगों से हीन, सत्कर्म करने में आसो,

चनी होकर भी निघंन हो जाता हे (मान०) (जा० भ०) । मकर में शुक्र के समान

फूल (qo जा०) ।

१२-शुक्र मीन का--राजा की कृपा से वैभव प्राप्त, शत्रुओं पर आक्रमण करने

वाळा, घन को प्राप्त, दोन मनुष्यों को घन देने में मन, नम्रता युक्त, तैरने में प्रीठि + (जा० भ०) (मान०) । बिहान्‌ और सम्पन्न, राजपूजक, सबका प्यारा (qo जा०) ।