सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 309, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंW#Á —— T I š
भिन्न-भिन्न राशि में ग्रहो का फल : २९३
७--शनि का राशिफल -
१-शनि मेष में--घन से होन, दुर्बळ देह, पुरुषों से विरोध करने वाला जिससे
मनोरथ की हानि, मित्रों से बिरोध, शांति रहित (मान०) (जा० भ०) । मूखं, फिरने
वाला, कपटी, नेत्र रहित (qo जा०) 1
२-शनि वृष का--स्त्री के सुख से होन, चुगलों या दुष्ट जनों का संग, बुद्धिहीन,
पुत्रोत्सव से रहित (जा० wo) (मान०) । बहुत स्त्री, अगम्या से गमन, ऐश्वर्य रहित (go जा०) ।
३-शनि मिथुन का--ज्यादा चलने से ओर निर्मलता से रहित, घर को छोड़ कर
बाहरी भोगों के कुतुहल से हीन, सज्जन पुरुषों से आनन्द कभी नहों प्राप्त, हास्य विलास
आनन्द करने वाळे सुख को नहीं पाता (जा० भ०) (मान०) । बुध क्षेत्री-निलंज्ज,
दुःखित, अपुत्र, लिखने में भूल करने वाला, रक्षा स्थान (कारागार) आदि का स्वामी
तथा प्रधान (qo जा०) ।
४-हानि कर्क का-<दुबंल देह, माता से रहित, लक्ष्मी के कारण उत्तम भोगविलास करने वाला, धनवान्, शत्रुओं का नाशक, समता रखने से हीन (जा० To)
(सान०) । दरिद्री, दंत रोगो, मातृ रहित, पुत्र रहित, मूर्ख (qo जा०) ।
५-शनि सिंह का--लिखने को विद्या में कुशल, कलह करने में मन, उत्तम शील
(स्वभाव) से हीन, नोति मार्ग से बहिष्कृत, पुत्र स्त्री से पीड़ा को प्राप्त (जा० भ०)
(मान०)। मूर्ख, दुःखित, पुत्र रहित, भार ढोने वाला या दास कर्म करने वाला
[वृ० जा०) ।
६-शनि कन्या का--जो कुछ काम करे असफलता पावे, विनय से हीन, चञ्चल,
स्नेह वाला, कभी बलयुक्त कभी बलहीन, चलायमान मन, नम्नताहीन (जा० To)
(मान०) । मिथुन के शनि सदृशफल (qo जा०) ।
७-शनि तुला का--अपने कुल में राजा के समान बलयुक्त, अधिक कामी, दरिद्रं
को दान देने वाला, राजा से सम्मान प्राप्त, (मान०) (जा० भ०)। प्रख्यात कीति,
समूह प्राम सेवा आदि में पुज्य और धनवान् (बु० जा०) ।
८-शनि वृश्चिक का--विष अग्नि तथा शस्त्र से भय, धन का नाशक, शत्रुओं तथा
रोग से पीडित, विफलता युक्त, इच्छित सुख से रहित ( मान० ) ( जा० भ० ) । मारने
आंघने वाला, हत्यारा, चपल, निदंय ( qo जा० ) ।
९--शनि घनु का-पुत्र गण से परिपूर्ण मनोरथ वाला, विख्यात कीति, उत्तम
जीविका, वैभव ओर संतोष युक्त ( मान० ) ( जा० भ० ) । गुरुक्षेत्री (९-१२ राशि का)
स्वयं अंत अवस्था में सुख पाने वाला, शुभ कमं से मृत्यु, दुर्मरण, अपघात, अत्पमृत्यु
जलप्रवाह, दुर्गपात, अग्नि विष शस्त्र आदि से न होगी । राजद्वार में उसकी प्रतीति हो,
अच्छी स्त्री युक्त, सत् पुत्र, सत् घन युक्त, सेवा या ग्राम का अघिनेता (qo जा०) ।
१०--शनि मकर का-राजा में प्रीति रखने से महत्त्व पाने वाला, अगर, पुष्प
कस्तुरी, उत्तम चंदन तथा उत्तम सुगंधित द्रव्यो से सुख ( जा० भ० ) ( मान सा० )1