भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२९४ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

स्वक्षेत्री-पराई स्त्री व पराये धन से युक्त, ग्राम सेवा में अग्रणी ( मुख्य ), नेत्र मंद हो,

सदा मलिन शरीर, स्थिर घन व ऐइवयं वाला ( वृ० जा० ) 1

११- शनि कुम्म का- व्यसन करने वाला, शत्रु से हार पाने वाला, कर्तव्य कर्म करने

से रहित, अच्छे मित्र युक्त किन्तु छात्रुओं के मदंन करने में सहायता होन, वडा घनी

(जा० अ० ) ( मान० ) मकर के शनि सदृश फल (qo जा० ) ।

१२--मीन का शनि-विनय, व्यौहार तथा सुशीलता युक्त, सब मनुष्यो में विख्यात

गुण वाला, उपकार करने में निपुण, अनेक वैभव युक्त ( मानसा० ) ( जा० भ०) 1 घनु

के शनि सदुश फल ( qo जा० ) ।

राहु का राशि फल

राहु कन्या या मिथुन का ६ या ८ घर में, केन्द्र या त्रिकोण में हो तो--शूरवोर,

बलवान्‌, सुभोगी हो, घर में हाथी आदि वाहन पुत्र व रत्न आये और आनन्दित हो

( प्रारब्ध योग ) ।

अध्याय--१४

द्वादशा भावों में भिन्न-भिन्न राशियों का फळ

१ लग्न में राशियों का फल

१-लर्न में मेष-छाल शरीर. कफ प्रकृति, अधिक क्रोधी, कृतघ्न, मंद'ईडि, स्थिरता

युक्त, स्त्री तथा नोकरों से सदा पराजित । fA

२-लन् में वृप--मानसिक रोग; स्वजनों से अपमानित, प्रिय पुरुषों से वियोग,

कलह युक्त, सदा दुःखी, शस्त्र से घात, धन क्षय ।

3— में मिथुन-गोरांग, स्त्री में आसक्त, राजा से पीडित, दूत का कर्म करे, प्रिय

याणी, बड़ा नम्र, गान विद्या में प्रवोण, सिरके बाल उत्तम ।

४-हरूग्न में कर्क--गोर अ ग, मित्राषिक्य, पुरुषों को इच्छा पुरी करने वाला, हँसी,

नदी में तैरने का प्रेमी, बड़ा बुद्धिमान्‌, पवित्र, क्षमावान्‌, धमं में रुचि, सेवा करके

योग्य ।

५-छर्त में सिह--पांडुवर्ण, वायु ओर कफ से पीड़ा, मांस प्रिय, बड़ा तीक्षण, शुर￾वीर, बड़ाढीठ, निरंतर भ्रमण करने वाला ।

६-लग्न में कन्या--वात पित्त इलेष्म युक्त, प्रिय स्त्रो से पराजित, वासना से डर￾पोक, मायावी, शुभ कांता को भावना करने वाला, काम से पीड़ितांग ।

७-लग्न में तुला--कफ युक्त, सत्य वक्ता, सदा स्त्रियों से स्नेह, राजा से मान, देव

पुजन में तत्पर ।

< न ¿—s में वृश्चिक--क्रोघी, वृद्धता युक्त, राजा से पीड़ित, गुणों से युक्त, शास्त्रः

क्ता में अनुरागी, शत्रुगणो को मारने वाला ।

९-लनन में धनु--राजा से सम्बन्ध रखने वाला, काय करने में प्रवीण, देव ब्राह्मण