भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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द्वादश भावों में भिन्न-भिन्न राशियों का फल : २०५

णनुरागी, घोड़ों को रखने वाला, सुहृदजनों का काम करने वाला, घोड़े के समान जंघा ।

१०-लग्न में मकर--संतोषी, बड़ा डरपोक, पाप करने में निरत, कफ और वायु को

पीडा, लंधा शरोर, शत्र जनों से ठग विद्या करने वाला ।

११-लग्न में कुभ--धैर्य युक्त, वात प्रकृति, अविक जलसेवो, मित्र के उपकार को

शरीर समर्पण, मैंथुन प्रिय, सज्जन अनुरागी, सब पुरुषों का प्रेमी |

सत्याचार्य ने कुम्भ लग्न अच्छा नहों कहा है । यवनाचार्य ने समस्त कुम्भ लग्न को

. नहीं किन्तु लग्न में कुम्भ के द्वादशांश को अशुभ कहा है । विष्णुदत्त कहते Q कि यवन

मत से कुम्भ द्वादशांश बुरा है तो वह सभी लग्नों में आयेगा तो क्या सभो बुरे हो जायेंगे

इसीलिये उचित यही है कि कुम्म लग्न हो जन्म म अशुभ है केवल कुम्भांशक बुरा

नहीं है ।

१२-लरन में मीन--जलक्रीडा प्रेमी, बडा विनोत, स्त्री सहवास को उत्सुक, वडा

पंडित, छोटा शरीर, बडा प्रचण्ड, पित्ताधिक्य, बडा यशस्वी ।

२ धन भाव में राशि फल

१-घन में मेष राशि--पुण्य से एकत्र घन, सुन्दर नातिवान्‌, चतुष्पद पालन से धन,

पंडित, एक अच्छा पुत्र हो ।

२-घन में वृष--खेती से घन प्राप्त, चौपाये, अन्न मणियों से सदा घन प्राप्त या

इनको पास रखने वाला ।

३-घन में मिथुन--स्त्री के निमित्त से घन प्राप्त करे, सुवर्ण चाँदी के आभूषण और

बहुत वाइन युक्त, साधुजनों का प्रिय ।

४-घन में कर्क--वृक्ष, जल से उत्पन्न किया घन, जल से भय, वन के कंद मूल आदि

भोजी, न्याय से धन संग्रह कर्ता, पुत्रों से प्रीति ।

५-घन में सिह--बनवासी, घनवान्‌, तप करने वाला, मान पाने वाला, सब का

उपकारो, अपने पराक्रम से घन एकत्र करने वाला ।

६-चन में कन्या--राजा से घन प्राप्त, सुवर्ण मोतो आदि तथा हाथी घोड़े आदि

से उत्पन्न किया घन होता है ।

७-घन में तुला--पुण्य प्रताप से पाषाण से भी घन निकले, मही के व्यापार से

शारीरिक पीडा से तथा खेती द्वारा उत्पन्न घन को एवं कर्म द्वारा उत्पन्न घन को पाता

है । खरीदने बेचने से या न्याय से इकट्ठा किया घन होता है ।

८-घन में वृश्चिक--स्वघमे पालन, काम इच्छुक, सदा विचित्र बात कहने वाला,

ब्राह्मण देव भक्‍त ।

९-घन में घनु--स्थिर विधान से उत्पन्न किये घन का पाने वाला, उत्तम चतुष्पद

पालन से घन, यशस्वी, रस से उत्पन्न वस्तुओं को खाने वाला, घर्म विघान का लोमी ।

१०-धन में मकर--अनेक प्रपंच से तथा अनेक उपायों से घन पाने वाळा एवं राज

सेवा से, खेती से, विदेश जाने से घन प्राप्त करने वाला ।