सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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१२ भाव और उनके गुणघम : १५
( š ) पणफर--( केन्द्र से दुसरा घर )--२, ५, ८, ११ भाव ।
( ४ ) आपोपिलम ( केन्द्र से तीसरा घर )—3, ६, ९, १२ भाव।
( ५) त्रिकोण--५, ९ भाव ये शुभ स्थान हैं । शुभ संज्ञक हैँ ।
त्रिकोण १, ५, ९ भाव है, परन्तु १ भाव लग्न हे इससे ५, ९ भावको ही
विशेषत: त्रिकोण कहते हैं ।
अन्य मतसे:--कलि में वलवान शनि राहु केतु के ३-६ त्रिकोण स्थान हैं ।
सूर्य, मंगल के १०-११ तथा ५-९ त्रिकोण स्थान हैँ ।
१ ६ ) ज़ित्रिकोण--९ वाँ स्थान ।
( ७ ) चतुरत्त--४, ८, स्थान 1
(८) निक, दुःस्यान या gsz स्वान--६, ८, १२ भाव ।
ये बुरे स्थान हैं शेष स्थान अच्छे हैं ।
(९) लीन स्थान--३, ६, ८, १२ स्थान ।
(१०) त्रिषणाय--३-६-११ स्थान ।
(११) वेशि स्थान--जिस घर में सूर्य हो उससे दूसरा स्थान ।
यात्रा में वेशि स्थान को लग्न मान कर प्रस्थान करे तो शुभ होता है । वेशि स्थान
में शुभग्रह हो या शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो शीघ्र शुभ फलदायक होता हे 1
(१२) बुद्धि स्यान--१, ३, ९ स्यान ।
(१३) शुभ स्थान--जब ग्रह लग्न या अन्य स्थान से ३, ४, ५, ९, १०, ११ स्थान में
होते हैं तो वे अच्छा फल देते हैं ।
(१४) नाश स्थान--८-१२ स्थान ।
(१५) पाप गृह--(घर)--पाप ग्रह के स्वस्थान पापगृह कहलाते हैं ।
(१६) शुभ गृह(घर)--शुभ ग्रह के स्वस्थान शुभ गृह कहलाते है. । ११७) मारक स्थान--२, ७ भाव ।
--१-- शुभ स्यान--१, ४, १० भाव (तीन केन्द्र ) और ५, ९ भाव ( त्रिकोण ) ११वाँ
=S. A, भाव-शुभ है ।
x— ara स्यान--तोसरा भाव । यह न शुभ है और न अशुभ ।
“... दूसरा और सातवाँ स्थान शुभ ग्रह की स्थिति से सामान्य हो जाते हँ ।
~ २--भशुभ स्यान--२ और ७ भाव में यदि अशुभ ग्रह हों तो ये घर भी अशुभ हो जाते
हैँ ६, ८, १२ स्थान सदा अशुभ हैं ।
उपचय (३-६-१०-११ घर) दुष्ट स्थान ( ६-८-१२ घर ) पर विचार
यहाँ यह आपत्ति है कि छठा घर कर्ज, रोग, शत्रु, का है यह उपचय है ओर दृष्ट
स्थान भो है । पहिले बताया उपचय अच्छा और अन्त का दुष्ट स्थान बुरा है।
उपचय में ग्रह अच्छे होते है और दुष्ट स्थान में बुरे होते हैं। यहाँ ६ को उपचय के
लिये छोड़ देना चाहिये। ८-१२ घर दुष्ट स्थान लेता चाहिये जैसे त्रिकोण और.