भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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१६ : ज्योतिष-शिक्षा, तृतोय फलित खण्ड

केन्द्र में दोनों में १ स्थान हैं परन्तु. त्रिकोण में १ स्थान को छोड़ देते हैं केवल ५-९ घर.

हो त्रिकोण में लेते हैं । १ को केन्द्र में ले लेते हैं ऐसा मत कुछ लोगों का है ।

अदृश्य खंड--अनुदित खंड, लग्न के भोग्यांश से सप्तम के भुक्तांश तक ।

वृष्य खंड--उदित खंड, सप्तम के पा लग्न के ,, ñ

पूर्वाद्च--दशम के भोग्यांश से चतुर्थ के भुक्तांश तक

पइ्चिमाद्ध--चतुथं के ” दशम ” ”

किस भाव से क्या क्या विचारना

(१) लर्न से--शरीर सम्बन्धी सब विचार होता है। रूप, काला, गोरा आदि

वणं ( शरीर का रंग ), शरीर की दुर्बलता पुष्टता, शारीरिक गठन, आकृति

तिल मसा आदि चिल्ल, शरीर के लघु दोघे आदि का ज्ञान, तेज आचरण, शांत

क्रूर आदि स्वभाव, गुण, शील, यश (कीति), शरीर का बळ ( पराक्रम ), साहस,

अहंकार, अज्ञान, निन्दा, शरीर का शुभाशुभ, बाल यौवन आदि अवस्था, भायु'

प्रमाण, जाति (कुळ), सुख-दुःख आत्मा, आरोग्यता, स्थान प्रवास, सम्पत्ति, मस्तक

और माता-पिता के देह आदि का इससे विचार होता ë ।

(२) घन भाव--से धन घान्य का विचार, घन की सिद्धि, सुवणं आदि वस्तुओं का

क्रय-विक्र य, रत्न और कोष (खजाना) का संग्रह, मोती, सोना, चाँदी, रत्न और

लोहा, सीसा आदि धातु का विचार, पूर्व अजित द्रव्य का विचार, स्वश उपाजित

द्रव्य या पितु-सम्बन्धी द्रव्य का विचार । पुरुष का सुख, भोग आदि, सौभाग्य,

सत्यता-असत्यता, रुचि का विचार, खाने के पदार्थ द्रव्य (भोजन के प्रकार), पाचच |

और वस्त्र का विचार, मुख, जिह्वा ( बोलने की शक्ति ), चेहरा, नेत्र-विशेषतः ¦

दक्षिण नेत्र का शुभाशुभ, शरीर का दक्षिण अंग, साधारण विद्या, शिक्षा और

भिन्न-भिन्न मन्त्र का विचार, क्रोध कापट्य आदि का विचार, अर्व कर्म, (अरवज्ञान),

पशु-पक्षी आदि घन संज्ञक वस्तु, निज कुटुम्ब, सेवक (नौकर), मित्र, शत्रु, मौसी,

मातुल (मामा) ओर मृत्यु का विचार । इसका प्रभाव गर्दन, गला, कण्ठ व Q= -.

पर पड़ता हूँ। | (३) सहज भाव--इससे सगे भाई-बहन का विचार होता है। ज्येष्ठ और छोटे ' भाई. /

का विचार, विशेष कर कनिष्ठ भ्राता भगिनी का विचार होता है । भाई बहिन ˆ

की संख्या--कितने जियेंगे, कितने मरेंगे, भाई का सुख, दास-दासी, चाचा-ताऊ

और उनकी पत्नी, मामा, माता और पितृव्य, माता-पिता का मरण, नातेदार

आस-पास के सम्बन्धियों का सुख असुख, विक्रम, पराक्रम ( साहस ), बल, सहन- शक्ति, धैर्य, स्वतः का स्वार्थ, चालाकी, दुष्ट बुद्धि, कन्दमूल आनि खाने के पदार्थों का सुख, कुभोजन, सुभक्ष, सुधा, क्रीडा, युद्ध, दारण, उपदेश, सहाय, आश्रय, पात्रता-अपात्रता, पत्रिक कमं की हानि, भूषण, औषधियों का विचार, दीघं जीवन, - आजीविका, व्यापार, उद्यम, यात्रा ( मागं घलना ), छोटी-छोटी रेल या बैलगाड़ी

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