सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 313, कुल 418 में से
संदर्भ में पढ़ेंद्वादश भावों में भिन्न-भिन्न राशियों का फल : २९७
(२) चतुर्थ में वृष--अनेक मान्य पुरुषों से, श्रवीरता से, राज सेवा से, प्रिय उपचारों से, अनेक नियम ब्रत करने से सुख पाने वाला ।
(३) चतुर्थ में मिथुन--स्त्रियों के लिये विविध सुखों को प्राप्त, जलक्रीडा तथा वन
फूलफळ आदि से तथा बहुत से पुष्प और वस्त्रों से सुख प्राप्त ।
(४) चतुर्थ में कक--छूपवान्, सुभग, सुशील, स्त्रियों को सम्मत, सवं गुण सम्पन्न
विद्या में प्रवीण, मनुष्यों को प्रिय, तथा जल से उत्पन्न, कूप तालाब आदि से व बगीचा
आदि से सुख ।
(५) चतुर्थ में सिहत क्रोध के कारण कभो सुख'न पावे, कन्या संतान हो,
दरिद्रता हो, शोल रहित ।
(६) चतुर्थ में कन्या--बहुत घन होने के कारण कुमित्र संगी, चुगलों के संग से चोरो
के निमित्त से और मोहन उच्चाटन आदि से सुख नहीं पाता ।
(७) चतुर्थ में तुला--सौम्य सरल स्वभाव, गुम कम में दक्ष, विद्या विनीतवान्,
सुख सम्पन्न, प्रसन्न चित्त, अनेक घन सम्पन्न ।
(८) चतुर्थ में वुष्विक--विपत्ति युक्त, तीक्ष्ण शत्रु से भयभीत, बहुत सेवा करने वाला, पराक्रम के घमंड से रहित, बडा चतुर, बुद्धिमान् मनुष्यों से हीन ।
(९) चतुर्थ में घन--संग्राम में सुखी, संग्राम कोर्तन से, विचित्र घोड़ों से, अपने
उद्यम से सुख पावे या घन प्राप्त करे ।
(१०) चतुर्थ में मकर--जल सेवन से, बावली तालाब बगीचा आदि के सम्बन्ध
से सुख, प्रधान मित्रों के उपचारों से व पिता की सेवा से सुख का भागो हो ।
(११) चतुर्थ में कु म--स्त्री के आश्रय से, मिष्ठान्न पान से, फळ शाक पत्र से,
न्वछुराई के वाक्यों से, उत्साह करने वाले उत्तम वाक्यों से अनेक प्रकार सुख पाने वाला t
(१२) चतुर्थ में मोन--जल के आसरे से, देवताओं के निमित्त से, सुन्दर वस्त्रों से,
विचित्र सुंदर धनों से सुख पाने वाला, मन्द गमन करने वाला 1
पंचम भाव में राशि फल
(१) पंचम में मेष राशि--प्रिय मित्र के साथ, पुत्रों के साथ एक सम्मति होने के
कारण, एवं देव पूजा के आश्रय से अनेक आनन्द मिले तब मी पापों में फेंसने के कारण
उसका मन व्याकुल रहे ।
(२) पंचम में वृष--स्त्रो भाग्यवती, रूपवती, संतति रहित, तेजस्वी पतित्रता मिले ।
(३) पंचम में मिथुन--पुत्र मन को सुख देने वाले, शील युक्त, गुणवान्, परस्पर
श्रीति युक्त विनय करने वाले महाबली ऐसे अनेक पुत्र हों ।
(४) पंचम में कर्क--बड़ी कीतियुक्त, महानुभाव, घन युक्त, विनय युक्त, सर्वत्र
असिद्ध पिता को प्रसन्न करने वाले कई पुत्र हो 1
(५) पंचम में घिह--ऋूर स्वमाव वाले) विशाल नेत्र वाले, मांस प्रेमी, कस्या उत्पन्न करने वाले, विदेश में रहने वाळे बड़े तीव्र ओर भुधायुक्त पुत्र हो ।