सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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द्वादश भावों में भिन्न-भिन्न राशियों का फल : २९९
होने पर भी मित्रों के साथ वेर होता है । किसी समय उस मनुष्य को घर को प्राप्ति
होती है ।
(११) षष्ठ में कुभ--राजाओं से, जल जोवों[ुसे, वापी तालाब के निमित्त बड़े
जागीरदारों से और भी बड़े-बड़े घनीमान्य वृद्धजनो से वैर होता है ।
(११) षष्ठ में मोन--सदा अपने पुत्र पुत्रियो के साथ कलह होता है, स्त्री के
निमित्त से वस्त्र आभूषण आदि के कारण अपने खुद के. कारण से तथा परस्पर प्रिय
पुरुषों से वेर होता है ।
सप्तम भाव का राशि फल
१-सप्तम में मेष राशि--स्त्री अति दुष्ट क्रूर स्वभाव वाळो, पापिनी, बड़ी कठिन,
नृशंस, घनप्रिया ओर अत्यंत दुष्टा हो ।
२-सप्तम में वुष--अति स्वरूपा, नम्र भाषो, सोने पिरोने में चतुर, शांत प्रकृति
वाली, पतिब्रता, सुन्दर गुणों से युक्त, लक्षण वंती, ब्राह्मण देव की भक्त स्त्रो होवे ।
३-सप्तम में मिथुन--स्त्रो युक्त, सुन्दर बर्ताव वाला, रूपवान्, सद्गुण सम्पन्न
विनीत वेष वाला, गुण रहित स्त्रो संयुक्त हाता है ।
४-सप्तम में कर्क--अति मनोहरा, सौभाग्य युक्ता, गुण सम्पन्ना, सोम्यख्पा,
कुलहीना प्रिय पत्नी मिले । ;
५-सप्तम में सिह--तीव्र स्वभाव वालो, कर्कशा, अति दुष्टा, सुंगार होन, दूसरों
क्ले घर में रहने वाली, घन की इच्छा करने वाली, थोड़ा काम करने वालो, अति
दुर्बलांग स्त्री मिळे ।
६-सप्तम में कन्या--सुन्दर स्वरूप वालो, पुत्रों से रहित, सोभाग्य, भोग्यघन,
नीति से युक्त, प्रिय वचन भाषी, सत्यवादिनो, दृढ़ चित्त वालो पत्नी मिले ।
७-सप्तम में तुला--गुणों के गवं से युक्त अनेक प्रकार की स्त्रियों को प्राप्त, पुण्य
जिसको प्यारा, घमं तत्पर, इन्द्रियों को दमन कर्ता, पृथ्वी की तरह अति विनीत जिसके .
अनेक पुत्र हों ।
८-सप्तम में वृश्चिक--सुन्दर स्त्रो, कलाओं से अनभिज्ञ, अति कृपण, सुणिक्षित,
नम्रता से रहित, अनेक दुर्भाग्य सूचक दोषों से सम्पन्न ऐसी स्त्री मिले 1
९-सप्तम में घन--अति दुष्टा, दुष्ट स्वभाव वाली, निलंज्जा, पर के दोषों को
याद करने वाली कलह प्रिया ईर्ष्या युक्त पत्नी मिले ।
१०-सप्तम में मकर--कपटी स्त्री, नीच, निलंज्ज, अति लोभी, कूर, बड़े मिजाज
वाली, पापिनी, अधिक दुःख भोगने वाली स्त्रो मिले ।
११-सप्तम में कुम--स्त्री अति.दुष्टा, कठोर स्वभाव वालो, देव ब्राह्मण पर प्रसन्न
रहे, घ्म की घ्वजा सत्य और दया से युक्त स्त्रो मिले ।
१२-सप्तम में मीन--अनेक विकारों से.युक्त, दुष्ट स्वभाव वाली, किसो का विश्वास.
न करने वाली, विशेष कलाओं से अनभिज्ञ स्त्रो मिरे 1