सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 316, कुल 418 में से
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३०० : ज्योतिष-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
अष्टम भाव में राशि फल
१-अष्ठम में मेष राशि--विदेश वासी, रोगो, अनेक आत्मा सम्बन्धी बातों फो
याद करने के कारण मूच्छित हो, बड़ा घनी, अत्यंत दुःखों से युक्त ।
२-अष्टम में qq— के विकार से घर में मृत्यु, अति भोजन से, चौपाये से या
रात्रि समय दुष्ट जन सम्पकं से मृत्यु ।
३-अध्टम में मिथुन- शत्रुओ के संग से या लाभ के कारण या रस संभव वस्तुओं
के खाने से या गुदा रोग से या प्रमेह से मृत्यु ।
४-अष्टम म कक--जल में इब कर या किसी भयंकर कीड़ा के निमित्त से या अन्य प्रकार के पुरुष के हाथ से परदेश में मृत्यु ।
५-अष्टम में सिह--किसी रेंगने वाळे से या जंगल में रहने से या चोरों के कारण
या किसी चतुष्पद के निमित्त से बन में मृत्यु ।
६-अष्टम में कन्या--अति भोग विछूस करने से या स्वचित्त को भावना से, स्त्री
की हत्या करने से, विषम आसन से या पर स्त्रियों के निमित्तं से अपने घर पर मृत्यु ।
७-अष्टम में तुला--किसी मनुष्य के हाथ से, रात्रि के समय अधिक उपवास करने
के कारण कोप करने से या अति पराक्रम करने से मृत्यु हो ।
८-अष्टम में वृष्चिक--कुष्ट आदि रुघिर रोग से या पेट में कीड़ा होने से या विष
खाने से अपने ही घर में मृत्यु ।
९-अष्टम में घनु--अति ताप देने बाले गुह्य स्थान के दोष से या किसी चतुष्पद
से या बाण से या जल से अपने हो घर में मृत्यु हो ।
१०-अष्टम में मकर--विद्या से युक्त, मान तथा गुणों से सम्पन्न, अति कामी
शूरवीर, वक्ष:स्थल चोड़े, शास्त्रार्थ करने वाला, सब कलाओं में प्रवीण ।
११-अष्टम में कुम--घर में अग्नि के लग जाने से, सारी सम्पत्ति नाश हो या
अजोब घावों से या वायु जन्य विकारों से या अधिक शुभ से विदेश में मृत्यु ।
१२-अष्टम में मोन--अतिसार की बीमारो से बड़े कष्ट से या पित्त विकार से या जल के सम्बन्ध से या रक्त प्रकोप से या शस्त्र से मृत्यु हो ।
नवम भाव में राशि फल
१-नवम में मेष--चौपायों के दान या पोषण, दया विवेक द्वारा पालन आदि
क्रिया से धर्म करने वाला ।
२-नवम में वृष--धर्मात्मा, विचित्र दान दे, अनेक गौदान से, आभूषण वस्त्र और
भोजन दान करनें से सुशोभित होता है ।
३-नवम में मिथुन--धमंमति, सरळ स्वभाव, अम्यागतों ब्राह्मणों का भोजन द्वारा
सत्कार करने वाला ।
४-नवम में कर्क- कठिन व्रत उपवास से या तीथे भ्रमण से या वन में तपस्या करने से सदेव घर्म करते रहता है ।