भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished418 पृष्ठ

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द्वादश भावों में भिन्न-भिन्न राशियों का फल : ३०१

५-नवम में सिह--किसी अन्य घर्म का मानने वाला, कुकमों, द्वारा अपने धर्म से दोन, अपने को ही तीथं स्वरूप मानने वाळा, विनय से रहित । ६-नवम में कन्या--स्त्रो धर्म का कट्टर पक्षपाती, कई जन्म से भक्ति रहित, पाखण्ड फा आश्रय करके या {कसो अन्य पक्ष का आश्रय करके घमं करने वाला । /°~नवम में तुछा--सदा प्रसिद्ध, धर्मात्मा, देव ब्राह्मणों की प्रसन्नता रूप और मनुष्यों के अनुराग से अनेक अद्भुत धर्म को करता gl

८-नवम में वृश्चिक--पाखण्ड धर्म में लीन, पुरुषों को पीड़ा देने वाला, भक्ति से रहित, पर पोषण आदि से हीन ।

९-नवम में घनु--सदा घमं करने वाला, देव ब्राह्मण भक्त, शास्त्रोक्त विख्यात धर्म ( सनातन ) के अनुसार संघ्यादि क्यों के लिये अधिक जल का उपयोग होता हो ऐसे धर्म को करता है ।

१०-नवम में मकर--अघमं करने वाला, प्रताप शाली, अनेक विडम्बना फे कारण वैराग्य युक्त तथा अपने कुल का आश्रय करता Ë ।

११-नवम में कुभ--देव समूह निमित्त से होने वाळे सुख को पावे, वृक्ष सम्बन्धी या बगीचा वावड़ी आदि घर्म कमं से प्रेम करने वाला ।

१२-नवम में मीन--अनेक घमं करे, सत्पुरुषों की सेवा, बगीचा तालाब आदि. निर्माण कराने से या तोर्थाटन से अनेक प्रकार से आर्थिक सुख पावे । दशम भाव में राशियों का फल

१-दशम में मेष--अघमं करने वाला, वडा दुष्ट, चुगलखोर, विनय रहित लोक में साधुजनों द्वारा निन्दित ।

२-दशम में वृष--अघिक खरचं करने वाला, साघुजनों पर दया करने वाला, देव ब्राह्मण अतिथि जनों का श्रेणी अनुसार सत्कार करने वाला ।

३-दशम में. मिथुन कर्म को प्रधान करने वाळा, गुरुजनों की आश्ञानुसार चलने

वाळा, कीति युक्त जनों से प्रीत करने वाला, बड़ा प्रतापी, खेती से जीविका ।

४-दशम में कर्क--ण्याऊ बगीचा तालाब वावड़ी आदि सम्बन्धी कर्मों को करता है,

दयालु और निष्पाप ।

५-दशम में सिह--अति पापी, अपने बलानुसार प्राणी वध रूप विकृत कर्म करने

में नित्य निदा पावे ।

६-दशम में कन्या-अज्ञ कमं करने वाला, उसके घर में स्त्री ही मालिक हो, भवित

के विरुद, तुच्छ वीर्य वाला, राजा के दरबार में मंत्री रहकर भी निघंनी हो।

७-दशम में तुला-वणिज्य के कायं को बहुतायत से करने वाला, घमं, रूप, मति

युक्त, सज्जन प्रिय, दूसरों की सम्पत्ति को प्राप्त करता ë । ë

८-दशम में वृश्चिक--सबकी भलाई के लिये कर्म करने वाला, सबों का सम्मत,

देव गुरु ब्राह्मणों के लिये खुब खच करने वाला परन्तु अति निर्दय और नीति रहित ।