सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 318, कुल 418 में से
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३०२ : ज्योतिश-शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
९-दषाम में घन--लाभ युक्त-सब काम करने वाला, जेल से छुड़ाने आदि परोपकार
का काम करने वाला, राजा के समान भूमि और यश प्राप्त करता है ।
१०-दशम में मकर--बड़ा प्रतापी, कर्म को प्रधान मानने वाला, दया रहित, भाई
बंदों से युक्त, घमं रहित, दुष्ट सम्मत कम को करता š!
११-दशम में कु मकं को प्रधान मानने वाला, शत्रु तथा दूसरों को Sra, के
“लिये पाखंड घमं से युक्त, इष्ट लोभ से विश्वास रहित, अपने मनुष्यों के विरुद्ध काम
करता है ।
१२-दशम में मोन---सत्र कुल घामिक गुरुजनों से उपदिष्ट को करने वाला, कीर्ति
युक्त धैय शालो, आदर के साथ अनेक ब्राह्मणों को आराघन में तत्पर ।
लाभ भाव में राशियों का फल
१-लाभ में मेष--चतुष्पदों के व्यापार या राज सेवा से या देशान्तर सेवन से पूरा
-लाम हो । p
२-छाभ में वृष--सज्जनों से या स्त्रियों से, खेती करने से, या गाय आदि की सेवा
से अति लाभ ।
३-लाम में मिथुन--सदा लाम युवत, स्त्रियों को अति प्रिय, अच्छी वस्तुएं घन
“एवं सुन्दर-सुन्दर मुख्य आसन, खान पान से अनेक प्रकार का लाभ हो 1 पंडितों से भी
खूब प्रसिद्धि हो 1
४-लाम में कक--सेवा करने से या खेती से या शास्त्र को वृत्ति से, साधु जन
सम्बन्ध से अति लाभ हो ।
७ - लाभ में सिह--निदा से या अनेक पुरुषों के बध, बन्धन से या देशान्तर में
नौकरी के आश्रय से या व्यायाम से भी घन का पर्याप्त लाभ हो ।
६-लाभ में कन्या--शस्त्र से, वेद आदि से, विनय भौर अद्भुत ज्ञान से अनेक लाभ
हो और पूजा को प्राप्त हो ।
७-डाभ में तुला--विचित्र तरीके के व्यापार से पूर्ण घन लाभ हो । साघु सेवा से,
विनय से, बडे सुख को प्राप्त हो ।
८-लाभ में वृश्चिक--छल करने से, पाप करने से, अच्छे बोलने से, दूसरों की
चुगली करने झादि अनेक विकारों से अत्यंत लाभ हो ।
९-लाम में घनु--राजाओं के आश्रय से, अनेक प्रकार के भोग विलास करता है ।
संत पुरुषों की सेवा करने से या अपने ही पुरुषार्थ से और किसी साम्राज्य के मुख्य गुप्तचर
के आराधन करने से पूणे धन लाम हो ।
१०-छाभ में मकर--जहाज द्वारा, या परदेश में जाकर नौकरी करने से और
राजसेवा से बहुत घन का लाभ हो परन्तु सब लाभ अत्यन्त व्यय हो जाता Š 1 ११-छाम में कुम्भ--कुकमं करने से, दान करने से, घर्म करने से, पराक्रम से ओर.