सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग ३ (खण्ड १)
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 3 (Part 1)
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंद्वादश भावों में भिन्न-भिन्न राशियों का फल : ३०३
१२-लाभ में मीन--मित्रों के आश्रय से स्नेह से नित्य अनेक लाभ हो। व्यय भाव में राशियो' का फल (१) व्यय में मेष--सुख पुर्वक भोजन वस्त्र में, चोपाये जीवों की «अधिक संख्या बढ़ाने में और नाना प्रकार के पुरुषार्थ में अर्थात् घन वृद्धि के लिए कार्यालय आदि खोलने में बहुत खर्च हो।
(२) व्यय में वृष--किसी रियासत की प्राप्ति के उद्देश्य से, अपने पराक्रम के जताने अनेक घातु वादों से, कई पण्डितों के साथ विवाद होने से, मुकदमा मादि लग जाने विचित्र वस्त्र और स्त्रियों के निमित्त से बहुत खर्च होता है । (३) व्यथ में मियुन-स्मो निमित्त व्यसन से, भूत-प्रेत देव आदि की बाधा हटाने के अनुष्ठान पुजा आदि में, खोटे विभव से, पापी मनुष्यों के संग करने से, हाथी आदि के खरीदने में फिजूल खर्ची हो ।
(४) व्यय में कक--ब्राह्मणों देवताओं के निमित्त, यज्ञ के निमित्त, घमे काम में जैसे पाठशाला, मन्दिर आदि बनवाने में, साधुजनों द्वारा प्रशंसित कायं में बहुत खर्च हो । (५) व्यय में सिंह--संगय न करने-वाळा, अति क्रोधी, अपने रूप की सजघज बनाने में, दुष्ट कर्म के निमित्त से, सदा राजा या चोर से, पुत्रोत्पत्ति के अवसर पर संस्कार आदि सम्बन्ध में अति खर्च होता Š, सज्जनो से निद्य ।
(६) व्यय में कन्या--स्त्रियो के निमित्त से प्रसन्नतापुर्वक खर्च करने वाला, विवाह, यज्ञोपवीत आदि स्वकार्य या जातीय मांगलिक मुख्य कर्मो के निमित्त से या साघुसंग से
या राजमान से, विचित्र वाक्यों से और
से, से,
“खर्च करने वाला ।
(७) व्यय में तुला--देव ब्राह्मण का सेवक, श्रुति स्मृति के अनुकूल धर्म करने में खर्च करने बाला, अनेक यम नियम ब्रतोपवास के निमित्त से, पुत्रों के कारण से, सेवा के कारण अधिक खर्च करे जिससे संसार में खूब नाम.हो ।
(८) व्यय में वुश्चिक--दीन दुःखियों को अन्न सस्त्रादि देने से, अनेक विडम्बनाओं
से, या दुष्ट मित्र की सेवा कुबुद्धि निमित्त और चोर मनुष्य के अधिकार से बहुत खर्च
होता है ओर लोक में वह निदित समझा जाता ë 1
(९) व्यय में घनु--पापी जनों के संग से या जाति के अधिकारी मनुष्यों से क्षगड़ा
करने से मुकदमा में अधिक खर्च हो या खेती में या सेवा करने में खर्च हो ।
(१०) व्यय में मकर--पापी मनुष्यों के भोजन कराने के निमित्त से खचं, अपने
अगं के मनु्य का पूजक, थोड़ी खेती करने बाळा, अत्यन्त होन, सर्वत्र निदित ।
(११) व्यय में कुम्म--देव सिद्ध मनुष्य, ब्राह्मण, तपस्वो, वंदी जनों के निमित्त खर्च
होता है, साघुजनो के सेवन से तथा शास्त्र प्रसिद्ध करमो से विख्यात होता है । हि.
(१२) व्यय में मोन--जलयात से या कुसंग से ओर maqa पुत्रों के निमित्त से, खाने-
पीने के निमित्त से, विवाद या यात्रा के निमित्त से घन खर्च हो। . ५